जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के आज संगठन के 34वे राष्ट्रीय अधिवेशन में दिए गए बयान पर बवाल मचा हुआ है. अब उनके दिए गए भाषण का विरोध मुस्लिम समुदाय से ही शुरू हुआ है. मौलाना अरशद मदनी के बयान पर सूफी इस्लामिक बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता कशिश वारसी ने कहा कि इस्लाम भारत का मूल मजहब नहीं है. भारत का मूल मजहब सनातन है. उन्होंने मौलाना महमूद मदनी को फतवे की फैक्ट्री बताया। मौलानाअरशद मदनी ने दावा किया था ये इस्लाम की धरती है. यहां इस्लाम बाहर से नहीं आया. उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में इस्लाम अरब से आया था.
इस्लाम को बाहर से आने वाले मुसलमान लेकर आए
कशिश वारसी ने कहा कि इस्लाम भारत का मज़हब नहीं, इस्लाम को बाहर से आने वाले मुसलमान लेकर आए. हजरत मतालतुल औलिया, मकर्बुर शरीफ एक बुजुर्ग आए उसके बाद हिंदुस्तान में अरब से कासिम बिन मालिक केरल में आए उसके बाद ख्वाजा गरीब नवाज आए जिन्होंने भारत में इस्लाम को फैलाया. भारत में उनके ही किरदार से इस्लाम यहां फैला है. कशिश वारसी ने कहा कि आज देश की मौजूदा सरकार किसी भी मुसलमान को बाहर का नहीं मानती.
फतवे जारी करना अरशद मदनी की आदत
कशिश वारसी ने अरशद मदनी को फतवे की फैक्ट्री बताते हुए कहा कि फतवे जारी करना उनकी आदत है, पता नही इसबार उनका कौन सा सियासी खेल है, उन्होंने कहा कि फतवा फैक्ट्री का यह बयान कुछ दिनों देश में सियासत को चमकाता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का तो नारा भी है कि सबका साथ, सबका विकास का है. सरकार की योजनाओं का जितना फायदा हिंदू को होता है उतना ही मुसलमान का भी है.

