लखनऊ। समाजवादी पार्टी के लिए आगामी विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव सिरदर्द बन सकता है। उप्र में सपा विधायक शिवपाल यादव और आजम खान की नाराजगी पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। इसके अलावा सपा के कई नाराज विधायक भी आजम खान और शिवपाल सिंह यादव के सम्पर्क में हैं। इसके अलावा सपा के साथ विधानसभा चुनाव लड़े सहयोगी दल भी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।
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सपा के सहयोगी दल के नेता इस समय शिवपाल से संपर्क कर उनसे मुलाकात भी कर चुके हैं। सपा के प्रमुख सहयोगी ओम प्रकाश राजभर भी अब अपनी नाराजगी अखिलेश यादव के खिलाफ खुले मंच से जाहिर कर रहे है। इन सबके बीच राज्यसभा चुनाव में अगर अप्रत्याशित नतीजे देखने को मिले तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं हो सकती।
बता दें कि 24 मई से उप्र की 11 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। आजम खान ने अपनी रिहाई के बाद जेल से निकलकर अपनी सधी भाषण शैली में बिना किसी पर आरोप लगाए सिर्फ इतना ही कहा कि सबसे ज्यादा जुल्म उनके अपनों ने किया। आजम खान के इस सियासी भाषण में कई मायने छिपे हैं।
आजम खान ने जेल से रिहा होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश से कोई बातचीत नहीं की। सपा की ऐसी हालत देख अब पार्टी की डैमेज कंट्रोल के लिए मुलायम सिंह यादव ने मोर्चा संभाल लिया है। बताया जा रहा है कि मुलायम सिंह जल्द ही जेल से छूटकर आए आजम खान से मिलकर उनकी शिकायत और गिले शिकवे दूर करेंगे।
बता दें कि आजम खान जेल जाने से पहले भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनके नेता मुलायम सिंह यादव ही हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक से शिवपाल सिंह यादव के अलावा आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला ने दूरी बनाए रखी। बता दें कि सपा विधायक आजम खान 10 वीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। ऐसे में सपा विधायक आजम खान विधानसभा में समाजवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं।
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प्रदेश में पिछली सरकारों के कार्यकाल की बात करें तो विधानसभा में सपा के संकटमोचक हमेशा आजम खान ही रहे हैं। चाहे वो सरकार मुलायम सिंह यादव की रही हो या फिर उनके बेटे अखिलेश यादव की। संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आजम खान विधानसभा की कार्यवाही में सपा का पक्ष मजबूती से रखते थे। अब समाजवादी पार्टी के इन धुरंधरों के बीच ही दूरी देखने को मिल रही है तो अब यह काफी दिलचस्प होगा कि आजम खान इस विधानसभा सत्र में भूमिका में नजर आते हैं। समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार को विधानसभा में मंहगाई और कानून व्यवस्था पर घेरने की रणनीति बनाई है। लेकिन सपा के अधिकांश मुस्लिम विधायक पार्टी के स्टैंड को लेकर खुश नहीं है।

