देहरादून। इस समय प्रदेश में आर्किड (Orchids) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में आर्किड की करीब 100 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। आर्किड के उत्पादन बेरोजगारों और स्वयं सेवी संस्थाओं के लिए रोजगार का साधन बन सकते हैं। आर्किड का सबसे बड़ा हब पश्चिमी बंगाल है। जहां पर आर्किड के व्यावसायिक उत्पादन तैयार किए जाते हैं। आर्किड की खेती करके स्थानीय स्तर पर ऑर्किड के व्यावसायिक उत्पादन पर काम कर अच्छा रुपया कमाया जा सकता है। ऑर्किड के सुगंधित फूल की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मांग रहती है। देश भर में आर्किड की खेती कर उसको पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग में भेजा जाता है जहां से यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात किया जाता है।
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प्रदेश में आर्किड की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग किसानों को और ऐसे बेराजगारों केा जो कि इसकी खेती कर लाखों कमाना चाहते हैं उनको आर्किड के बारे में जानकारी दी जा रही है। वन अनसुंधान केन्द्र ने चमोली और पिथौरागढ़ जिले के किसानों को दार्जिलिग स्थित ऑर्किड सेंटर पर ट्रेनिग के लिए भेजा उत्पादन कम और आयात पर निर्भरता होने के कारण आर्किड की बाजार में जबरदस्त डिमांड है। बाजार में इसकी कीमत भी काफी अधिक होती है। इस फूल के एक पैकेट यानी 12 फूल दाम 500 रुपये तक है। सीजन में तो यह दाम करीब 1500 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंच जाता है।

