ज़ीनत सिद्दीक़ी

प्रधानमंत्री मोदी जी ने कल देश को सम्बोधित किया, सम्बोधन अपेक्षित भी था क्योंकि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आंकड़ों के अनुसार काफी धीमी पड़ चुकी थी और वैक्सीन के संकट पर जहाँ विपक्ष पूरी तरह घेराबंदी किये हुए था वहीँ सुप्रीमकोर्ट भी लगातार फटकार लगा रहा था. कार्टूनिस्ट मंजुल ने कल ही एक कार्टून पोस्ट किया था जिसमें चार फ्रेम नज़र आ रहे हैं. हर फ्रेम में मेज़ पर रखा हुआ टीवी है, दो फ्रेम में कोरोना मामलों का ग्राफ तेज़ी से ऊपर जाता दिख रहा है और मोदी जी मेज़ के नीचे छिपे हैं, तीसरे फ्रेम में कोरोना का ग्राफ तेज़ी से नीचे आया है तो चौथे फ्रेम में मोदी जी टीवी पर बरामद दिखाई दे रहे हैं. कहने का मतलब यह कि हमारे प्रधानमंत्री जब जब किसी संकट में घिरे होते हैं ऐसा ही करते हैं, यही उनका स्वाभाव है कि जब हमले ज़्यादा हो रहे हों और बचाव के लिए हथियार कम हों तो छुप जाना ही बेहतर है.
खैर बात मोदी जी सम्बोधन से शुरू हुई थी इसलिए आगे की वार्तालाप भी उसी पर. अपने सम्बोधन में मोदी जी जो ख़ास बातें कहीं उनमें सभी को मुफ्त टीका, 75 प्रतिशत वैक्सीन की खरीद, कोरोना वैक्सीन का निर्माण, अपनी नीतियों की तारीफ, विपक्ष की घेराबंदी और कोरोना नीति पर आलोचना करने वालों को देश विरोधी बनाने का प्रयास।
अब पहला सवाल तो यही उठता है कि बार बार टीकाकरण नीति में बदलाव क्यों? पिछले चार-छः महीने में टीकाकरण नीति पर यह तीसरा बदलाव है, अब एकबार फिर टीकाकरण का सारा कामकाज केंद्र सरकार की देखरेख में होगा। क्या विपक्ष की घेराबंदी के कारण वैक्सीन नीति में यू टर्न लेना पड़ा या फिर सुप्रीम कोर्ट के दबाव में यह फैसला आया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट साफ़ तौर पर कह चूका था कि सरकार की वैक्सीन नीति पहली नजर में मनमानी और तर्कहीन दिख है और अदालतें इस पर खामोश नहीं रह सकतीं. किसी को मुफ्त टीका मिल रहा है तो किसी को भुगतान करना पड़ रहा है. वैक्सीन की कीमतें भी अलग अलग हैं और 18 प्लस का वैक्सीनेशन राज्यों के भरोसे क्यों छोड़ दिया गया? इन सबसे बड़ी बात कि सर्वोच्च न्यायालय ने उन 35 हज़ार करोड़ का हिसाब भी मांग लिया जो टीकाकरण के लिए प्रस्तावित थे.
अपने सम्बोधन में मोदी जी ने टीका बनाने वाले वैज्ञानिकों और अपनी टीकाकरण नीति की तो खूब तारीफ की मगर पहले के टीकाकरण अभियानों पर सवाल भी खड़े किये। मोदी जी की यह टिप्पणी देश में पहले के टीकाकरण के कार्यक्रमों और वैज्ञानिकों का क्या अपमान नहीं है? उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चेचक जैसी बीमारी जो कभी महामारी थी 1970 में देश से ख़त्म हो चुकी थी इसी तरह 1911 में देश पोलियो-मुक्त हो चूका था, तपेदिक पर पूरा कण्ट्रोल हो चूका था. क्या इसका श्रेय देश की दूसरी सरकारों और वैज्ञानिकों को नहीं देना चाहिए था.
मोदी जी अपने सम्बोधन में कहते हैं आधुनिक विश्व ने इस तरह की त्रासदी पहले कभी नहीं देखी, मगर दूसरी सरकारों को नाकारा साबित करने में वह यह भूल गए कि देश को आधुनिक बनाया किसने, देश में जो इंफ्रास्ट्रक्चर है उसे किन लोगों ने खड़ा किया जिसके दम पर कोरोना की लड़ाई लड़ी जा रही है.
मोदी जी ने लोगों को पिछले 50-60 साल का इतिहास बताते हुए कहा कि पहले विदेश टीका हासिल करने में दशकों लग जाते थे, विदेशों में जब टीकाकरण पूरा हो जाता था तब भी भारत में टीकाकरण शुरू नहीं हो पाता था. तो मोदी जी! लोग आपसे यही तो पूछ रहे हैं कि आपने देश की वैक्सीन विदेशों में क्यों भेज दी जबकि देश के लोग वैक्सीन के लिए भटक रहे थे. आपको तो 50-60 का इतिहास मालूम है कि पहले अपने फिर पराये।
मोदी जी ने अपने सम्बोधन में एक बात जो सबसे विशेषरूप से कही कि देश में बनाई हुई कोरोना वैक्सीन न बनी होती तो कल्पना कीजिये क्या होता? आपकी बात बिलकुल सही है. देश की कोरोना महामारी से जो हालत हो गयी है, शमशानों, क़ब्रिस्तानों और गंगा किनारे के जो दृश्य लोगों ने देखे हैं उन्हें याद करके रूह कांप उठती है. बेशक इसका सेहरा उन वैज्ञानिकों को जाता है जिन्होंने इतने कम समय में वैक्सीन का निर्माण किया और अभी भी काम जारी है. मगर इससे आप उन सवालों से बच नहीं सकते कि अगर आपकी कोरोना पालिसी इतनी ही प्रभावकारी थी और आपकी सरकार ने इतनी ही मेहनत और मिशन मोड पर काम किया तो आपके ही आंकड़ों के अनुसार साढ़े तीन लाख से अधिक लोगों की मौतें कैसे हुईं, इनका ज़िम्मेदार कौन है, विपक्ष या आप? या पहले की सरकारें?
हर बनी बात का सेहरा खुद पहनना और बिगड़ी बातों पर पिछली सरकारों और विपक्ष के मत्थे मढ़ने का दांव कब तक चला जायेगा। देश बड़े बलिदानों और कुर्बानियों के बाद 74 साल पहले आज़ाद हुआ था और विकास करते हुए आज यहाँ तक पहुंचा है, पर आपके सम्बोधन से लगता है कि 2014 से पहले देश गर्त में था और जो कुछ हुआ वह पिछले सात सालों में ही हुआ. याद रखिये कि देश में एक से बढ़कर एक महान नेता पैदा हुए जो आज इस दुनिया में नहीं हैं मगर उनके दिखाए रास्ते पर देश आज भी आगे बढ़ रहा है और आगे भी बढ़ता रहेगा। इसलिए यह कहना बंद कीजिये कि अगर हम न होते…

