कारोबारियों को राहत और अर्थव्यस्था को मिलेगी गति
कोविड से प्रभावित क्षेत्रों को भी दी जा सकती है मदद
धीरज उपाध्याय
कोविड 19 की दूसरी लहर ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी हैं। इस बार करोनावायरस की रोकथाम के लिए भले ही पूर्ण लाकडाउन नहीं लगाया गया था लेकिन क्षेत्रीय प्रतिबंधों का उद्योग धंधो पर व्यापक असर पड़ा है। खासकर निम्न (micro) और छोटे (small) एवं मध्यम (medium) कारोबारियों पर कोरोना की दूसरी लहर की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। केंद्र सरकार को इन उद्योगों और प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए एक बार फिर आत्मनिर्भर भारत पैकज की तर्ज पर राहत पैकेज (Stimulus Package) देकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करना होगा। हालांकि वित्तीय स्थिति के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के पास बहुत कुछ करने की गुंजाइश नहीं हैं।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार कोविड की दूसरी लहर से सबसे ज्यादा प्रभावित उद्योग और क्षेत्रों के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज लाने की तैयारी में है, जिसका मुख्य उद्देश्य लॉकडाउन से जूझ रही अर्थव्यवस्था को सहारा और गति प्रदान करना है।
सरकार और वित्त मंत्रालय का फोकस छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के साथ-साथ पर्यटन (travel), विमानन (airline) और आतिथ्य (hospitality) उद्योगों को उचित सहायता और प्रोत्साहन देने पर रहेगा हालांकि वित्त मंत्रालय की तरफ से अभी ऐसी किसी खबर की पुष्टि नहीं हुई हैं।
गौरतलब है कि कोविड (Covid-19) संक्रमण की दूसरी लहर ने भारत को महामारी का वैश्विक हॉटस्पॉट बना दिया था और मार्च 2021 में दूसरी लहर के बाद से भले ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त राष्ट्रव्यापी लाकडाउन नहीं लागू किया लेकिन रोजाना लगभग 2 लाख से अधिक मामलों के सामने आने के चलते देश के अधिकतर राज्यों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जो प्रतिबंध लगाया वो लाकडाउन से कम भी नहीं था।
पिछले करीब 45 दिनो से जारी लाकडाउन और कर्फ़्यू ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी हैं। कोविड की इस दूसरी लहर से निपटने के लिए अर्थशास्त्रियों ने सरकार को कुछ सुझाव दिये है जैसे कि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (direct cash transfer), ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) के तहत आवंटन बढ़ाना, मुफ्त खाद्यान्न वितरण (पीडीएस), ईंधन पर उत्पाद शुल्क में मामूली कटौती और त्वरित टीकाकरण। उनके मुताबिक इन उपायों के द्वारा सरकार अर्थव्यवस्था को जरूरी गति प्रदान कर सकती हैं। हालांकि केंद्र सरकार गरीबों को प्रति माह पांच किलोग्राम मुफ्त अनाज देने का निर्णय पहले ही ले चुकी ताकि तालाबंदी से प्रभावित गरीबों और प्रवासी मज़दूरों को कुछ राहत मिल सके।
बतादे कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि वह “बहुत विस्तृत पैमाने” पर अर्थव्यवस्था की निगरानी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होने हाल के दिनों में अर्थशास्त्रियों के साथ इस राहत और प्रोत्साहन पैकेज (Stimulus Package) के बाबत चर्चा भी की है। हालांकि मोदी सरकार के पास वित्तीय मोर्चे पर कलाबाजी दिखाने के लिए ज्यादा गुंजाइश बची नहीं है, भले ही उसे भारतीय रिज़र्व बैंक से लाभांश के रूप में लगभग 99,122 करोड़ रुपये मिले है। वित्तीय समाचार समूह ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता कहा कि ‘ लगता है प्रोत्साहन इस बार शायद सबसे अधिक टैक्स छूट के रूप में देखने को मिले हैं’।
उद्योगो से भी उठ रही हैं राहत पैकज की माँग
उद्योग चैंबर CII के अध्यक्ष और कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) के एमडी उदय कोटक ने भी मोदी सरकार को जल्द दूसरे राहत पैकेज के ऐलान का सुझाव दिया हैं। उन्होंने कहा कि कोविड 19 की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा है। खासकर निम्न वर्ग और छोटे एवं मध्यम कारोबारियों पर कोरोना की दूसरी लहर की सबसे ज्यादा मार पड़ी है और अगर इस समय उनके लिए राहत पैकेज (Stimulus Package) आता हैं और साथ मे देश में तेज गति से वैक्सीनेशन (vaccination) होता है तो सितंबर- अक्टूबर तक देश की आर्थिक स्थिति सामान्य हो सकती हैं।
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छोटे उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए बढ़ानी होगी क्रेडिट गारंटी योजना की राशि
कोटक ने कहा कि सरकार को छोटे कारोबारियों को बिना गारंटी के दिए जाने वाले कर्ज यानि क्रेडिट गारंटी योजना (Credit guarantee scheme) का बजट 3 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये करने भी विचार करना चाहिए। गौरतलब हैं कि पिछले साल केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर (Aatmnirbhar Bharat) भारत पैकेज के एक हिस्से के रूप में 3 लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (ECLGS) की घोषणा की थी।
उन्होने बताया कि अप्रैल और मई के दौरान कोविड की दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था और जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मौजूदा वित्त वर्ष के लिए आईएमएफ़ (IMF) सहित अन्य एजेंसियो ने आर्थिक वृद्धि दर 11 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया था लेकिन अब शायद ये विकास दर घटकर 10% से कम रह सकती है।

