जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता से भारत-ईयू रिश्तों को नई धार, पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट पर भी हुई अहम चर्चा
निकोसिया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की साइप्रस यात्रा ने भारत की वैश्विक कूटनीति को नई मजबूती दी है। यूरोपीय संघ की अनौपचारिक विदेश मंत्रियों की बैठक ‘जिम्निच’ में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल होकर भारत ने यह संकेत दिया कि बदलते वैश्विक समीकरणों में उसकी भूमिका लगातार प्रभावशाली होती जा रही है। साइप्रस और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व के निमंत्रण पर हुई इस यात्रा को भारत-ईयू संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया, यूक्रेन युद्ध, भूमध्यसागरीय क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों पर पड़ रहे असर जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि भूमध्यसागर क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और नई दिल्ली यूरोपीय संघ के साथ अपने सहयोग को और व्यावहारिक रूप देना चाहती है। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को लेकर भारत का दृष्टिकोण भी साझा किया।
साइप्रस के राष्ट्रपति से मुलाकात में व्यापार, रक्षा और टेक्नोलॉजी पर बनी सहमति
जिम्निच बैठक के इतर विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास, साइप्रस के विदेश मंत्री डॉ. कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा और स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इन बैठकों में भारत-ईयू संबंधों को मजबूत बनाने के साथ पश्चिम एशिया और यूक्रेन की मौजूदा परिस्थितियों पर विचार-विमर्श हुआ।
डॉ. जयशंकर ने साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स से भी मुलाकात की। इस दौरान व्यापार एवं निवेश, रक्षा-सुरक्षा, कनेक्टिविटी, नवाचार, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि हालिया उच्चस्तरीय संवादों से भारत-साइप्रस संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं और दोनों देश साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह यात्रा भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत नई दिल्ली यूरोप और भूमध्यसागरीय देशों के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत कर रही है। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, इस दौरे ने भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा देने के साथ वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका को भी मजबूती से स्थापित किया है।
