लखनऊ। UP Election 2022 समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party ) ने मेरठ की हस्तिनापुर सीट से बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक योगेश वर्मा (Yogesh Verma) को अपना प्रत्याशी बनाया है। योगेश वर्मा पश्चिमी यूपी के बड़े सियासी चेहरों में से एक हैं। दलित समाज से आने वाले योगेश वर्मा (Yogesh Verma) की अपने समाज में बड़ी पैठ मानी जाती है। योगेश वर्मा की पत्नी सुनीता वर्मा मेरठ की महापौर है। गौरतलब है कि मेरठ की हस्तिनापुर सीट सुरक्षित सीट है।
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योगेश वर्मा (Yogesh Verma) को कभी बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती का करीबी माना जाता था। कुछ साल पहले एससी- एसटी एक्ट में हुए संशोधन के विरोध में मेरठ सहित पूरे प्रदेश में हिंसा हुई थी। मेरठ में हजारों की भीड़ ने आगजनी और तोड़फोड़ की थी। जिसके बाद भाजपा के नेताओं ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाकर विरोध जताया था और प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों पर दबाव डालकर योगेश वर्मा को थाने पर बुलवाया जिसके बाद उन्हें बेइज्जत कर जेल में डाल दिया गया था। जिसके बाद पूरे पश्चिमी यूपी में दलितों का आक्रोश पड़ा था और योगेश वर्मा के समर्थन में कई जगह प्रदर्शन हुए थे। हालांकि बाद में मायावती से मनमुटाव के बाद उन्होंने पार्टी का दामन छोड़ दिया था। योगेश वर्मा ने 2007 में बसपा के टिकट पर हस्तिनापुर से चुनाव लड़ा था और विधायक बने थे। 2012 के विधानसभा चुनाव ( Assembly Election 2022 )में एन वक्त पर मायावती ने योगेश वर्मा का टिकट काट दिया था जिसके बाद उन्होंने बगावत करते हुए पीस पार्टी से चुनाव लड़ा था। हालांकि 2012 के चुनाव में योगेश वर्मा को 2200 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें समाजवादी पार्टी के नेता प्रभु दयाल बाल्मीकि ने हराया था। फिलहाल कुछ महीने पहले ही समाजवादी पार्टी के गुर्जर नेता और अखिलेश यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले अतुल प्रधान ने उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल कराया था। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने अतुल प्रधान को भी विधानसभा का टिकट दिया है।
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बीजेपी से है मुकाबला
हालांकि योगेश वर्मा (Yogesh Verma) दलित समाज के कद्दावर नेता माने जाते हैं। नगर निगम के चुनाव में उन्होंने अपनी पत्नी सुनीता वर्मा को जिस प्रकार से जीत दिलाई थी, उससे उनकी सियासी ताकत का लोहा मेरठ के सभी राजनेताओं ने माना था। 2022 के विधानसभा चुनाव ( Assembly Election 2022 ) में योगेश वर्मा की लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के दिनेश खटीक से है। हस्तिनापुर सीट पर वोटर्स की संख्या के अनुसार 100000 मुस्लिम, 63000 दलित, 56000 गुर्जर, 26000 जाट, 1300 सिख और 10,000 यादव है। भाजपा के दिनेश खटीक प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। हस्तिनापुर को देखा जाए तो यहां पर दलित और मुस्लिम वोट बैंक निर्णय की स्थिति में है। ऐसे में योगेश वर्मा (Yogesh Verma) के लिए यह राह कुछ आसान हो सकती है।

