हस्तिनापुर विधानसभा यूपी में होने वाले चुनावों पर गहरा असर डाल सकता है क्योकि ऐसा माना जाता है कि कुरुवंश की राजधानी में जितने वाली पार्टी ही उत्तर प्रदेश का चुनाव भी जीतती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में चुनावी शंखनाद हो चुका है और दिलचस्प बात यह है कि हस्तिनापुर विधानसभा हर चुनाव में अपना विधायक बदलती है।
हस्तिनापुर को लेकर सियासी दलों में हलचल तेज़ है क्योकि हर पार्टी इस बात से अवगत है कि हस्तिनापुर कि सीट चुनाव का इतिहास बदल सकती है। होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने राज्यमंत्री दिनेश खटीक को मैदान में उतारा है वही समाजवादी पार्टी ने योगेश वर्मा के साथ पूरी तैयारी से जीतने की उम्मीद लगायी है। किन्तु, इतिहास गवाह है की हस्तिनापुर विधानसभा किसी का नहीं हुआ है।
माना जाता है कि इस विधानसभा क्षेत्र को द्रौपदी का श्राप है। करीबन 5 हजार साल पहले द्रौपदी ने हस्तिनापुर को श्राप दिया था कि ये हमेशा बदहाल ही रहेगा और आजतक यह क्षेत्र द्रौपदी के श्राप से मुक्त नहीं हुआ है।
हस्तिनापुर विधानसभा में कुल 3 लाख 50 हजार वोटरों की संख्या हैं जिसमे दलित और मुस्लिम वोटर का अधिक प्रभाव है। इस क्षेत्र में करीब एक लाख मुस्लिम वोटर हैं और 63 हजार के करीब दलित वोटर है। हालांकि, इस क्षेत्र के वोटरों की संख्या भी उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों को बदलने में ऐतिहासिक रही है।
पूर्ण रूप से इस विधानसभा सीट पर सभी पार्टियों की नज़र है जिसकी चर्चा लखनऊ से दिल्ली तक हो रही है।

