मृत्यु प्रमाण पत्र में कोरोना को मौत की वजह दर्ज कराने को अस्पतालों के चक्कर काट रहे परिजन
मुनीश कुमार
मेरठ। कोरोना के कारण अपनों को खोने वाले लोग अब मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिये भटक रहे हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र पर मृत्यु की वजह कोरोना अंकित करवाने के लिये अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग व्यवस्था को दोषी ठहरा रहे हैं। वहीं अधिकारियों के सब कुछ नियंत्रण में होने के दावों की पोल मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिये परेशान लोगों की भीड़ खोल रही है।
कोरोना का कहर परिवार के सदस्य पर मौत बनकर बरसा तो व्यवस्था भी कहर ढाने में कसर नहीं छोड़ रही है। पहले इलाज के लिये दर-दर भटकते परिवार जन अब मृत्यु प्रमाणपत्र, मौत के कारण का प्रमाण पत्र बनाने के लिए कोविड अस्पताल में भटक रहे हैं। मृत्यु प्रमाणपत्र पर मौत का कारण दर्ज न होने के कारण लोग को सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिये आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इलाज की समरी के लिए लोग अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। मेडिकल काॅलेज में भटकते योगेश, तौसीफ, रवि कुमार ने बताया कि वह अपने दिवंगत परिजन का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल करने के लिये डेढ़ महीने से चक्कर काट रहे हैं। मगर मेडिकल काॅलेज का स्टाॅफ मनमानी करता है। कई लोग तो 15-15 चक्कर लगा चुके हैं मगर मेडिकल कर्मचारी कभी स्टाॅफ न होने तो कभी प्रमाण पत्र पर साईन न होेने की बात कह टरका देते हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण दर्ज नहीं किये जाने के कारण लोगों को इलाज की समरी के लिए आवेदन करना पड़ रहा है। क्योंकि कोविड संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों के परिवारजन बीमा क्लेम, मृतक आश्रितों की नौकरी के लिये आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उनके पास मौजूद मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण दर्ज नहीं है। एलएलआरएम मेडिकल के कोविड अस्पताल में मृत्यु का कारण जानने के लिए 50 से ज्यादा आवेदन समरी के अटके हुए हैं। मगर आवेदन पर कोई सुनवाई न करने का आरोप यहां भटकते परिवारजन लगा रहे हैं।
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने को दलाल हुए सक्रिय
आपदा में अवसर तलाशने वाले मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिये भी सक्रिय हो गये हैं। मेडिकल कोविड वार्ड के बाहर भी अनेक ऐसे दलाल मौजूूद रहते हैं जो मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का दावा करते हैं। मगर इसके बदले में वह भारी-भरकम रकम की मांग करते हैं जिसे देना हर एक के बस में नहीं है। ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इस दलाली किये जाने के बारे में पता न हो लेकिन वह इनपर कार्रवाई करने की बजाये नजरअंदाज कर रहे हैं। कभी-कभार कार्रवाई करने की सोचते हैं तो अपने सूत्रों से दलालों को पहले ही खबर हो जाती है और वह मौके से भाग निकलते हैं।

