एक ऐसा मंदिर जहां माँ काली आती हैं स्वयं आरती लेने

मेरठ रीजनएक ऐसा मंदिर जहां माँ काली आती हैं स्वयं आरती लेने

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एक ऐसा मंदिर जहां माँ काली आती हैं स्वयं आरती लेने

मेरठ के सदर स्थित प्राचीन काली माई मंदिर की अनूठी है महिमा

4 सौ साल से भी पुराना है मंदिर का इतिहास

कहते हैं की जहां श्रद्धा होती है भगवान भी वही बसते हैं। जिस रूप में मनुष्य भगवान की पूजा आराधना करता है उसी रूप में ईश्वर उसकी प्रार्थनाओं का फल भी देते हैं। भक्तों की मनोकामना पूरा करने वाला ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है मेरठ के सदर इलाके में स्थापित इस मंदिर का नाम है काली माई मंदिर। कहते हैं किस प्राचीन मंदिर में जो भी भक्त मां काली से अपने मन की बात कहता है और नियमित उनकी पूजा करता है उसकी मनोकामना मां जरूर पूरी करती हैं। यही वजह है कि हर दिन दूर-दूर से भक्त मां के दर्शन करने आते हैं और खाली झोलियां भर ले जाते हैं।

माँ काली आतीं हैं स्वयं आरती लेने

सदर स्थित काली माई मंदिर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। इसके साथ ही यहां भक्तों के साथ हुए चमत्कारों के भी कई किस्से सुनने को मिलते हैं। यहां आने वाले भक्तों के अनुसार मां काली यहां स्वयं विराजती हैं। कहा जाता है कि मां की संध्या आरती के वक्त वह स्वयं मंदिर में उपस्थित होती हैं यही नहीं आरती तब तक शुरू नहीं होती जब तक मां स्वयं नहीं आ जाती है। भक्तों का तो यहां तक कहना है कि आरती के वक्त यहां स्थापित मां काली की मूर्ति में साक्षात मां के दर्शन होते हैं। जानकारों के मुताबिक ढोल नगाड़ों के साथ होने वाली संध्या आरती के वक़्त यहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

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चढ़ती है शराब

माता काली को मंदिर में शराब का भोग चढ़ाया जाता है मंदिर में भक्तों अपनी मुरादे लेकर आते हैं और माता को भोग में शराब चढ़ाते हैं कहा जाता है कि देवी को यह भोग देवी को अत्यंत पसंद है इसके अलावा भक्त माता को नारियल व चुनरी की भेंट भी चढ़ाई जाती है जबकि खास मौकों पर यहां बलि का भी प्रावधान है। दिवाली, होली व अन्य मौकों पर देवी को बलि भी चढ़ाई जाती है।

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कई सौ साल पुराना है इतिहास
माता काली का मंदिर बेहद प्राचीन है बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना कई सौ साल पहले हुई थी। उस दौरान यहां शमशान हुआ करता था और बीच में मां की मूर्ति थी जिसकी वजह से इस मंदिर को श्मशान काली भी कहा जाता है। लोग श्मशान में आते और मूर्ति देख कर उसकी भी पूजा करते थे। यहां आकर अपनी मन्नतें मांगते, लोगों की मुरादे पूरी होने लगी और दिनों दिन भक्तों की संख्या भी बढ़ने लगी। इसके बाद ही इस मंदिर को सिद्ध पीठ कहा जाने लगा। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग अपनी मुरादे मांगने आते हैं। भक्तों के अनुसार यहां हर तरह की परेशानी, समस्या, जादू टोना, भूत प्रेत जैसी दिक्कतें मां काली मिनटों में हर लेती हैं और अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर देती है।

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