मेरठ में रेड-लाइटएरिया की तालाबंदी जारी रखकर कोविड-19 के 90% से अधिक मामलों और मौतों को रोका जा सकता है

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मेरठ में रेड-लाइटएरिया की तालाबंदी जारी रखकर कोविड-19 के 90% से अधिक मामलों और मौतों को रोका जा सकता है

येल स्कूल ऑफ़ मेडिसिन और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शिक्षाविदों के अध्ययन से हुआ खुलासा
रेड-लाइट एरिया को बंद करके मेरठ में हज़ारों लोगों की जान बचाई जा सकती है

मेरठ , विशेषज्ञों के एक समूह के अनुसार, मेरठ में रेड-लाइट एरिया को खोले जाने पर यहां कोविड-19 के मामले, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या, और मौत के आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।  हालांकि, रेड-लाइट एरिया को लंबी अवधि तक बंद रखने से, इस महामारी की चरम स्थिति में देश में कोविड-19 के मामलों में कुल मिलाकर 90% से ज्यादा की कमी हो सकती है

इस मॉडल के अनुसार, अगर कबाड़ी बाजार रेड-लाइट एरिया को बंद कर दिया जाए तो इस महामारी के चरम तक पहुंचने में 50 दिनों की देरी होगी। इस मॉडल को हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और येल स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में विकसित किया गया है। ज्यादा जानकारी के लिए कृपया  www.CodeRedCOVID.org पर जाएँ।   

यह मॉडल दर्शाता है कि,कबाडी बजार रेड-लाइट एरिया को पहले की तरह खोल दिए जाने पर उस क्षेत्र में यह बीमारी बड़ी तेजी से फैल जाएगी, तथा इससे सेक्स-वर्कर्स के साथ-साथ उनके ग्राहक भी बड़े पैमाने पर संक्रमित हो जाएंगे। यहां संक्रमण की दर अत्यधिक इसलिए है क्योंकि सेक्स के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं है। फिर संक्रमित ग्राहक इस बीमारी को पूरे शहर में फैला देंगे, जिससे मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। अगर रेड-लाइट एरिया को फिर से खोल दिया जाए, तो लॉकडाउन के बाद पहले 100 दिनों की अवधि में मेरठ में इस बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या 35 गुना अधिक हो सकती है इससे बेहद कम समय में मेरठ की स्वास्थ्य सेवाओं पर जरूरत से ज्यादा दबाव बढ़ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप बेहद कम संख्या में मरीजों को इलाज प्राप्त हो सकेगा तथा मरने वालों की संख्या बढ़ जाएगी, जिसे अभी रोका जा सकता है। रेड-लाइट एरिया में कई ऐसे कारक शामिल हैं, जिनकी वजह से यह इलाका मेरठ के सबसे बड़े हॉटस्पॉट में से एक बन सकता है।

जर्मनी के सभी प्रमुख राजनेताओं ने वेश्यालयों को स्थायी रूप से बंद करने का आह्वान किया है और उन्होंने सभी जर्मन राज्यों के प्रमुखों को पत्र लिखते हुए कहा है कि, “इस बात को स्पष्ट तौर पर समझना कि वेश्याएं इस महामारी की ‘सुपर स्प्रेडर्स’ बन सकती हैं— क्योंकि नियम की दृष्टि से देखा जाए तो यौन गतिविधियां सोशल डिस्टेंसिंग के उपायों के अनुकूल नहीं हैं।” जर्मनी के कानून-निर्माताओं ने कहा, “वेश्यालयों को फिर से खोलने से इन महिलाओं को मदद नहीं मिलेगी… इसके बजाय, उन्हें प्रशिक्षु के तौर पर नौकरी, प्रशिक्षण या स्थाई रोजगार दिए जाने की आवश्यकता है।” 

निष्कर्षों के बारे में बताते हुए इस अध्ययन के सह-लेखक, डॉ. अभिषेक पांडे, येल यूनिवर्सिटी, ने कहा, सेक्स के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना असंभव है। सेक्स वर्कर्स, उनके दलालों और वेश्यालय के प्रबंधकों के साथसाथ रेडलाइट एरिया के निवासियों को संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। इस बीमारी की रोकथाम के प्रभावी उपायों को अमल में लाने तक रेडलाइट एरिया को बंद रखा जाना चाहिए, और ऐसा करके रेडलाइट एरिया के निवासियों की हजारों की संख्या में संभावित मौतों को रोका जा सकता है।

कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए विभिन्न देशों की सरकारों को सलाह देने हेतु गठित डॉक्टरों एवं शोधकर्ताओं के एक वैश्विक गठबंधन, कोड रेड कोविड के सदस्य, डॉ. सह्याकन ने कहा, “सेक्स के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क या सैनिटाइजेशन की तरह सुरक्षा का कोई भी तरीका, कोविड-19 संक्रमण को फैलने से रोकने में कारगर साबित नहीं हो सकता है। सेक्स-वर्क का स्वरूप ऐसा है, जिसकी वजह से रेड-लाइट एरिया में इसका सुरक्षित तरीके से अभ्यास नहीं किया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप सेक्स वर्कर्स के साथ-साथ शहर के लोग बड़ी संख्या में संक्रमित हो सकते हैं और मौत का आंकड़ा काफी बढ़ सकता है।”

जापान ने सही समय पर अपने रेड-लाइट एरिया को बंद नहीं किया जिसके चलते यहां कोविड-19 के मामलों में भारी “विस्फोट” दिखाई दिया, और सिर्फ एक कबाडी बजार रेड-लाइट एरिया की वजह से यहां के स्थानीय अस्पतालों पर दबाव काफी बढ़ गया। भारत में अगर रेड-लाइट एरिया को बंद रखने के बजाय फिर से खोल दिया जाए, तो इस महामारी की चरम स्थिति में यहां के अस्पतालों में 70% अतिरिक्त बेड की आवश्यकता होगी। अगर चतुर्भुज स्थान फिर से खुल जाए, तो इससे बेहद कम समय में उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर जरूरत से ज्यादा दबाव बढ़ जाएगा। इसके परिणामस्वरूप बेहद कम संख्या में मरीजों को इलाज प्राप्त हो सकेगा तथा मरने वालों की संख्या बढ़ जाएगी, जिसे अभी रोका जा सकता है।

इस अध्ययन में यह सलाह दी गई है कि, सेक्सवर्कर्स को ऐसे कौशल हासिल करने का अवसर अवश्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए जिससे उन्हें कम जोखिम वाले क्षेत्रों में नौकरी मिल सके। हाल की मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि, कुछ सेक्सवर्कर्स ने रोजगार के दूसरे विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। आंध्र प्रदेश में, सेक्सवर्कर्स को सामूहिक तौर पर इस दलदल से बाहर निकालने की रणनीति तैयार की जा रही है, जिसमें उनके लिएअस्थाई आवास की व्यवस्था, बैंक ऋण, और वैकल्पिक रोजगारसहित अन्य उपाय शामिल हैं। मेरठ के रेड-लाइट एरिया को बंद करने और सेक्स-वर्कर्स को कम जोखिम वाली नौकरियों की तलाश में सहायता उपलब्ध कराने से कई लोगों की ज़िंदगी बचाने में मदद मिलेगी। 

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