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ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला, बोलीं- मैं तब तक लड़ती रहूंगी, जब तक आपका अंत नहीं देख लूं

Mamata Banerjee attacks BJP

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी की उम्र को लेकर उसका अपमान नहीं करना चाहिए।

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव नतीजों के दिन बीजेपी के कुछ लोगों ने उनके लिए अपमानजनक बातें कहीं और उनकी मौत की कामना की। उन्होंने कहा, “मैं उन्हें बता देना चाहती हूं कि मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक आपका अंत न देख लूं। मैं आम लोगों और मजदूरों के लिए लड़ती रहूंगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के पास अभी भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हैं और लगातार नए लोग भी पार्टी से जुड़ रहे हैं।

चुनाव में TMC को बड़ा झटका

2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ। करीब 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

चुनाव में TMC को 80 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सरकार बनाई। इस चुनाव में ममता बनर्जी भी अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ 15,000 से ज्यादा वोटों से हार गईं।

पार्टी में हुई बड़ी बगावत

चुनाव परिणाम आने के करीब एक महीने बाद पार्टी के भीतर भी बड़ा विवाद शुरू हो गया। विधानसभा में नेता के चयन को लेकर मतभेद बढ़ गए।

बताया गया कि 80 में से 64 विधायकों ने अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया। यह संख्या दो-तिहाई बहुमत से अधिक थी, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस गुट को मान्यता दे दी।

लोकसभा में भी दिखी टूट

विवाद केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहा। लोकसभा में भी काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 28 में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाकर केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया।

रिपोर्ट के अनुसार, इस टूट की एक बड़ी वजह पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर बढ़ती नाराजगी और सत्ता से बाहर होने के बाद पैदा हुई राजनीतिक स्थिति को माना जा रहा है।

कानूनी लड़ाई भी जारी

फिलहाल तृणमूल कांग्रेस राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के आधिकारिक व्हिप और ‘असली TMC’ को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट और विधानसभा अध्यक्ष के स्तर पर विचाराधीन है।

राज्य की सत्ता जाने और पार्टी में बड़े विभाजन के बाद यह समय ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर माना जा रहा है।

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