महाकुम्भ में 17,310 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान

उत्तर प्रदेशमहाकुम्भ में 17,310 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान

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प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ ने न केवल शहर को एक गौरव प्रदान किया है, बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है। करोड़ों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आगमन से आतिथ्य, भोजन, ऊनी कपड़े, कंबल, रजाई, गद्दे और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई क्षेत्रों में व्यापार में उल्लेखनीय उछाल आया है, जिसकी बिक्री में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। खुदरा और थोक व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। महाकुंभ के इस शुरुआती चरण में भी बिक्री में दो से तीन गुना वृद्धि हुई है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के उत्तर प्रदेश चैप्टर के अनुसार, इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा उपयोग की जाने वाली दैनिक आवश्यक वस्तुओं से 17,310 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है। CAIT के यूपी चैप्टर के अध्यक्ष महेंद्र कुमार गोयल ने बताया कि अकेले पूजा सामग्री से 2,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है, जबकि 45 दिनों तक चलने वाले मेले के दौरान फूलों के व्यापार से 800 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। गेहूं का आटा, चीनी, चाय और मसालों सहित किराने का सामान 4,000 करोड़ रुपये का योगदान देगा, जबकि खाद्य तेल 1,000 करोड़ रुपये और जोड़ेंगे।

सब्जियों से 2,000 करोड़ रुपये और बिस्तर, गद्दे और चादर जैसे घरेलू सामान से 500 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। दूध और डेयरी उत्पादों से 4,000 करोड़ रुपये, हीटर और ब्लोअर से 50 करोड़ रुपये, जलाऊ लकड़ी से 50 करोड़ रुपये और गंगा जल ले जाने के लिए प्लास्टिक के जेरीकैन से 60 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। हॉस्पिटेलिटी सेक्टर 2,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है, रेंटल कार और ई-रिक्शा सहित यात्रा सेवाएं 300 करोड़ रुपये का योगदान देंगी और नाविक सेवाएं और विविध वस्तुएं क्रमशः 50 करोड़ रुपये और 300 करोड़ रुपये जोड़ेंगी। मकर संक्रांति स्नान तक खुदरा व्यापार में 20-25% की वृद्धि का अनुमान है। व्यापारियों को मौनी अमावस्या पर और वृद्धि की उम्मीद है।

महाकुंभ के दौरान प्रसाद, मिठाइयों और प्रसाद में सूखे मेवे का इस्तेमाल प्रमुख वस्तु के रूप में हुआ है। इस आयोजन के दौरान करीब 250 टन सूखे मेवे की खपत होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे महाकुंभ आगे बढ़ रहा है, प्रयागराज भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक जीवंतता का प्रतीक बन गया है। आस्था और वाणिज्य का यह संगम न केवल शहर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, बल्कि आध्यात्मिक और व्यापारिक गतिविधि के केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को भी रेखांकित करता है।

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