Lucknow : समस्या के समाधान में देरी करने पर बिजली विभाग देगा आपको मुआवजा

उत्तर प्रदेशLucknow : समस्या के समाधान में देरी करने पर बिजली विभाग देगा...

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ उपभोक्ताओं के लिए सोने पर सुहागा वाली खबर सामने आई है। इसके अनुसार अगर योजनाओं का लाभ तय समयसीमा के अंदर मिलना शुरु नहीं हुआ तो पावर कारपोरेशन को उपभोक्ताओं को इसका मुआवजा देना होगा। 

इस नये नियम का लाभ उपभोक्ताओं को अप्रैल से मिलना शुरू हो जाएगा। हालांकि यह सुविधा पहले भी थी लेकिन ऑफलाइन सिस्टम होने की वजह से इंजीनियर उपभोक्ताओं को इधर से उधर दौड़ाते रहते थे।

 लेकिन, अब इसे ऑनलाइन किया जा रहा है। इसका लाभ भी बहुत जल्द उपभोक्ताओं को मिलने शुरू हो जाएंगे। इसमें उपभोक्ताओं को अधिकतम 30 हजार रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है। 

यूपी राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह लंबी लड़ाई के बाद लागू हो पाया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अब पावर कारपोरेशन अलग से सॉफ्टवेयर तैयार कर चुका है। इससे पूरा सिस्टम भी पारदर्शी हो जाएगा।

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 उन्होंने कहा कि इसके अनुसार लाइनमैन से लेकर डायरेक्टर तक के मोबाइल पर ऐप के जरिये उपभोक्ताओं की शिकायतें ऑनलाइन दिखने लगेंगी। इससे अब जिम्मेदारों की जवाबदेही और अच्छे से लागू हो जाएगी। 

दो साल पहले ही बना था कानून

हालांकि यह कानून दो साल पहले यानी 2020 में बना था। बिल सही कराने से लेकर कनेक्शन तक के लिए उपभोक्ताओं की चप्पलें इंजीनियरों के पास दौड़ते-दौड़ते घिस जाया करतीं थीं। इससे निपटने के लिए साल 2020 में स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 मुआवजा कानून बनाया गया था।

 इसको लागू करने में कंपनियों ने दो साल का वक्ता लगा दिया। पिछले दो सालों से उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार नियामक आयोग में बिजली कंपनियों ने लिखित जवाब दिया है कि अप्रैल 2022 में इसको पूरे यूपी में लागू कर दिया जाएगा। 

दो महीने के अंदर देना पड़ेगा मुआवजा

उपभोक्ताओं की किसी समस्या का तय समय पर समाधान नहीं हुआ तो बिजली कंपनियों को इसकी कीमत चुकानी होगी। उपभोक्ताओं का पूरा मामला अब कानूनी रूप ले चुका है, ऐसे में देरी के लिए कंपनियों को भुगतान करना होगा। 

उपभोक्ताओं के पास सुविधा होगी कि अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ही ऑनलाइन मुआवजे की मांग कर लेगा। उस पर समय से कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी। 

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नियमों के अनुसार बिजली कंपनियों के उपर जो मुआवजा तय किया जाएगा, उपभोक्ताओं के बिजली में वह जोड़ दिया जाएगा। 60 दिन के अंदर उपभोक्ताओं को मुआवजे का भुगतान करना पड़ेगा। 

इतना तय हुआ मुआवजा

  1. – मीटर रीडिंग में देरी पर  200 रुपए प्रतिदिन 
  2. –  श्रेणी परिवर्तन में देरी पर 50 रुपए प्रतिदिन 
  3. – फर्जी बकाया को आगे बढ़ाने पर 100 रुपए  प्रतिदिन 
  4. – अंडर ग्राउंड केबल ब्रेक डाउन पर 100 रुपए प्रतिदिन 
  5. – कॉल सेंटर 1912 पर रिस्पांस न मिलने पर 50 रूपए प्रतिदिन
  6. –  विद्युत आपूर्ति बढ़ाने के लिए सब स्टेशन की स्थापना की देरी पर 500 रुपए प्रतिदिन
  7. –  नया कनेक्शन अतिरिक्त भार जहां आपूर्ति नेटवर्क विस्तार होना है 250 रुपए प्रतिदिन

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