Shab E Barat में होती है हलवे की मिठास खास

लाइफस्टाइलShab E Barat में होती है हलवे की मिठास खास

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मुसलमानों के इस त्योहार को लोग हलवे वाला त्योहार के नाम से भी जानते हैं

Zeba Hasan

त्योहार कोई भी हो मिठास के बिना अधूरा रहता है। और बात अगर शब-ए-बारात (Shab E Barat ) की हो तो इसका जिक्र हलवे के बिना अधूरा है। मुस्लिमों के इस त्योहार को लोग हलवे वाला त्योहार भी कहते हैं। हलवाईयों की दुकान से लेकर घरों तक हलवे की खुशबू बिखर जाती है। घरों की महिलाएं कई किस्म के हलवे तैयार करती हैं जो रमजान के महीने तक खाए जाते हैं। कहीं गीला हलवा तो कहीं सूखा हलवा। कहीं कतली हलवा तो कहीं मेवे वाला हलवा। शब-ए-बारात पर हलवे की कई किस्में खाने को मिलती हैं। क्यों होता है इस त्योहर पर हलवा खास, कितने प्रकार के बनते हैं हलवे और महिलाएं इसे लेकर क्या खास तैयारी करती हैं हमने भी इस बारे में जानने की कोशिश की।

हलवे पर होती है मुर्दों की फातिहा

शब-ए-बारात (Shab E Barat ) की पूरी रात लोग याद-ए-इलाही में जागते हैं। मान्यता है कि इस रात मुर्दों की रूह घर आती है। इसलिए इस रात अच्छा खाना बनाकर फतिहा करके गरीबों में दान किया जाता है। ऐसा करने से मुर्दे की रूह को सवाब और सुकून मिलता है। अपने बुजुर्गों को याद करने के लिए इस दिन हलवा बनाने की रस्म अदा की जाती है। यही वजह है कि घर की औरतें पूरा दिन तरह तरह के हलवे बनाती हैं। फातिहा के लिए वैसे तो सादा सूजी का हलवा बनता है लेकिन इस पर्व को यादगार बनाने के लिए महिलाएं चने की दाल का हलवा और अगर शब-ए-बारात ठंड के मौसम में पड़ती है तो मीठा खाने के शौकीन जौजी हलवा भी बनाना पसंद करते हैं।

पूरी लिस्ट होती है हाथ में

शीशमहल की बेगम अलमास अबदुल्ला कहती हैं कि बचपन में तो हम लोगों की जॉइंट फैमिली हुआ करती थी, बहुत मजा आता था। हमारे घर में तरह तरह के हलवे बनते थे जिनकी तैयारियां कई दिन पहले से होती थीं। अब तो सब अपने अपने घर के हैं, बच्चे पढ़ाई के लिए बाहर हैं लेकिन हलवे तो आज भी बनते हैं। पहले जहां पांच छह किलो का बनता था अब दो ही किलो बनता है। मैं तीन तरह के हलवे बनाती हूं। इसमें सूजी का सादा हलवा, सटोरा और चले की दाल का हलवा होता है। चने की दाल के हलवे की तैयारी तो एक दिन पहले से ही करती हूं यह तो घरवालों के खाने के लिए होता है। वहीं सादा सूजी वाला हलवा हमारे खानदान के जो लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं उनकी फातिहा के लिए बनता है। जितने लोग अब नहीं बचे हैं उनके नामों की लिस्ट हमारे हाथ में होती है। पांच पूरी और हलवे पर हर एक मुर्दे की फातिहा होती है। फिर यह खाना गरीबों को दे दिया जाता है। इसके अलावा बनता है सटोरा। यह भी सूजी का हलवा होता है लेकिन इसमे बहुत सारा मेवा पड़ता है इसे तर हलवा भी कहते हैं। यह हलवा हमारे 12वें इमाम की पैदाइश की खुशी में बनता है। शब-ए-बारात (Shab E Barat ) के दूसरे दिन यानी 15 शाबान को यह हलवा लेकर दरिया किनारे जाते हैं और अपने इमामा को हदिया (सौगात) पेश करते हैं।

सजने लगी हैं दुकाने

घरों में ही नहीं हलवे की महक मिठाइयों की दुकानों पर भी होती है। काफी लोग बाजार से ही हलवा खरीद कर इस परम्परा को निभाते हैं। महमूद नगर स्थित मौलाना मिठाई वाले पर बैठने वाले मोहम्मद अरशद कहते हैं कि हमारे यहां हलवा बनना शुरू हो गया है। सूजी के अलावा चने की दाल का हलवा भी हमारी दुकान पर बनता है। लोग हमारे यहां शब-ए-बारात (Shab E Barat) के लिए ऑडर्र पर भी हलवा बनवाते हैं। उस दिन पूरी रात हमारी दुकान खुली रहती है। लोग हलवा खरीद कर आस पास बैठने वाले फकीरों को भी खिलाते हैं।

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