मॉनसून में करें ये 5 काम तो बढ़ेगी शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता और बीमारियां रहेंगी दूर

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मानसून का मौसम अपने साथ सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि कई बीमारियाँ भी लेकर आता है। छोटे बच्चों या शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है या बिल्कुल विकसित नहीं होती है। ऐसे में मॉनसून उनके लिए और भी मुश्किल हो जाता है. अगर आपके घर में छोटे बच्चे या शिशु है तो इस मौसम में आपको उनका खास ख्याल रखना चाहिए। यहां हम आपको मानसून में बच्चों की उचित देखभाल के लिए कुछ टिप्स बता रहे हैं।

बच्चों को क्या दें

एस्टर हॉस्पिटल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना जरूरी है। अपने बच्चे को पौष्टिक आहार दें जिसमें फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों। आपको उसे खट्टे फल, दही, हल्दी, अदरक और लहसुन भी खिलाना चाहिए। इसके अलावा बच्चे को साफ पानी और ताजे फलों का जूस दें।

स्तनपान कराने वाली माँ को क्या खाना चाहिए?

यदि आपका बच्चा स्तनपान करता है, तो आपको मानसून के दौरान उसे स्वस्थ रखने के लिए अपने आहार पर ध्यान देने की आवश्यकता है। मां का दूध बच्चे को एंटीबॉडी देता है और उसे बीमारियों से बचाने के लिए विटामिन और खनिजों की आवश्यकता होती है। स्तनपान कराने वाली माताओं को अपने आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए, जिनमें ये सभी पोषक तत्व मौजूद हों।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

​बुखार, शरीर में दर्द और छींक आना या नाक बहना मानसून की बीमारियों के क्लासिक लक्षण हैं। ये किसी वायरल बीमारी के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं। शिशु में ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बारिश के मौसम में मच्छर बहुत होते हैं और अगर ये मच्छर बच्चे को काट लें तो परेशानी हो सकती है। मच्छरों से बचने के लिए बच्चे को मच्छरदानी के अंदर सुलाएं और शाम के समय उसे पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाकर रखें।

कैसे कपड़े पहनाएं

खासकर मानसून के दौरान शिशुओं और बच्चों को सूखे और हल्के गर्म कपड़े पहनाएं। बारिश के मौसम में कपड़े थोड़े गीले हो जाते हैं, इसलिए बच्चे को कपड़े पहनाने से पहले उन्हें इस्त्री कर लें। इससे कपड़ों से नमी दूर हो जाएगी. इस मौसम में आपको बच्चे की नैपी भी अधिक बार जांचनी होगी क्योंकि गीले डायपर से बच्चे को रैशेज या संक्रमण हो सकता है।

बाहर जाने से बचें

चूंकि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है इसलिए उन्हें गंदी, धूल भरी जगहों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न ले जाएं। बच्चों को उन जगहों से दूर रखें जहां अधिक घास उगी हो, क्योंकि वहां मच्छरों के काटने का डर रहता है। वहीं, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बच्चे के संक्रमित या बीमार लोगों के संपर्क में आने का खतरा रहता है। इसलिए बच्चे को भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न ले जाएं। कई बच्चों को बीमारियों से बचाने में टीके भी अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए अपने बच्चे को सभी जरूरी टीके लगवाएं।

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