दलित-ओबीसी लगायेंगे भाजपा की चुनावी नैया को पार ?

उत्तराखंडदलित-ओबीसी लगायेंगे भाजपा की चुनावी नैया को पार ?

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दलित-ओबीसी लगायेंगे भाजपा की चुनावी नैया को पार ?

दलित-ओबीसी समाज के नेताओं को मंत्री बनाकर सामाजिक समीकरण साधने का प्रयास

जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बना योगी सरकार ने की ब्राह्मण वोटर को लुभाने की कोशिश

अमित बिश्‍नोई

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से लगभग 6 माह पहले योगी सरकार ने अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए सात मंत्रियों को शपथ दिलाई है। इनमें एक कैबिनेट मंत्री और 6 राज्यमंत्री हैं। इस कैबिनेट विस्तार को लेकर सवाल उठे हैं की चुनाव से पूर्व योगी सरकार ने यह कदम क्यों उठाया। क्योंकि नवनियुक्त मंत्रियों को अपना काम करने के लिए लगभग 3 महीने का ही वक्त मिलेगा। क्योंकि माना जा रहा है कि जनवरी के दूसरे या तीसरे सप्ता्ह में उत्तंर प्रदेश में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। जिसके बाद यह मंत्री कोई विकास कार्य कराने या नीतिगत निर्णय लेने में असक्षम हो जायेंगे। और यह 3 महीने भी उनको अपना कार्य समझने में निकल जायेंगे। ऐसे में यह विस्तार करना जरूरी क्यों था और इस विस्‍तार से क्या लाभ होगा।।

दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की योगी सरकार ने अपने कैबिनेट विस्तार में सामाजिक समीकरण बैठाने का पूर्ण प्रयास किया है। इस कैबिनेट विस्तार में विभिन्न जातियों के नेताओं को मंत्री बना कर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गयी है। वही जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाकर ब्राह्मण वोटर को अपने पाले में खींचने का प्रयास भी योगी सरकार ने किया है। यह कैबिनेट विस्तार कर योगी सरकार ने सहयोगी दलों को साधने के साथ भाजपा हाईकमान की नाराजगी को दूर करने की भी कोशिश की है।

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2022 के चुनाव को ध्यान मे रखते हुए योगी सरकार ने ब्राह्मण समाज से जितिन प्रसाद, कुर्मी समाज से छत्रपाल गंगवार, दलित समाज से पलटू राम, ओबीसी समाज से संगीता बिंद, अनुसूचित जनजाति समाज से संजीव कुमार, एसी समाज से दिनेश खटीक, ओबीसी समाज से धर्मवीर प्रजापति को मंत्री बनाकर प्रदेश की विभिन्न जातियों व समुदाय को अपने पाले में खिंचने की कोशिश की है। कैबिनेट विस्तार में इस बात का ध्यान रखा गया है कि नवनियुक्त मंत्रियों से समाज में यह संदेश जाए कि भाजपा समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चलती है। चुनाव आचार संहिता लागू होते ही यह नेता भाजपा के प्रचार में जुट जाएंगे। विभिन्नी जाति और समुदाय के नेताओं के चुनाव प्रचार से भाजपा को दलित और ओबीसी वोटरों को लुभाने का मौका मिलेगा।

वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाने से ब्राह्मण वोट बैंक का रूख भाजपा की ओर होने की आशा भी पार्टी को है। क्योंकि जितिन प्रसाद की छवि एक ब्राह्मण नेता के रूप में बनी हुई है और ब्राह्मण वोटरों को कांग्रेस से जोड़ने का श्रेय भी जितिन प्रसाद को ही दिया जाता है। ऐसे में भाजपा को उनसे उम्मीद है कि वह ब्राह्मण वोट बैंक को भाजपा के पाले में लेकर आने में सफल होंगे जो आने वाले विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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निसंदेह चुनावी बेला में भारतीय जनता पार्टी का दांव विरोधियों को पटखनी देने के लिए काफी है। अब यह देखना काफी रोचक होगा की योगी सरकार की इस सामाजिक समीकरणों को एकजुट करने की रणनीति का जवाब विपक्षी दल किस प्रकार दे पाते हैं। गौरतलब है कि पंजाब में द‍लित नेता चरणजीत चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस दलित राजनी‍ति की शुरूआत कर चुकी है। उत्तराखंड में दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाये जाने की इच्छा हाल ही मे वहां के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जता चुके हैं। कांग्रेस सहित अन्य सभी दल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व दलितों को लुभाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। अब योगी सरकार की सोशल इंजीनियरिंग की काट विपक्षी दल किस प्रकार कर पायेंगे इसका इंतजार सभी को रहेगा।

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