देहरादून। उत्तराखंड में गैरसैण को लेकर भाजपा सरकारों ने बड़े बड़े दावे किये थे उन्ही दावों को पूरा करने की चाह में भाजपा के ही त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए गैरसैण क ग्रीष्मकालीन राजधानी और गैरसैण को कमिश्नरी बनाये जाने की घोषणा की थी. यही नहीं आम चङाव के बाद पहला सत्र भी गैरसैण में कराने का दावा किया गया था. लेकिन सत्ता के निजाम बदले तो पिछले निजामों के फैसलों पर भी नज़रे टेडी होने लगी. उत्तराखंड की जनभावना से जुड़े गैरसैण पर भाजपा के नए मुखिया का रवैया कुछ बदला हुआ लग रहा है. पूर्व में भाजपा के सीएम द्वारा घोषित ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में बजट सत्र न आयोजित करना इसी और इशारा कर रहा है. गैरसैण पर धामी सरकार की बेरुखी के चलते विपक्ष भी सरकार पर हमला कर रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो इसे विधानसभा और उत्तराखंड की जनता का अपमान कह दिया है.
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धामी सरकार के लिए गैर “गैरसैण” !
4 मार्च 2020 को बजट सत्र में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में गैरसैण को उत्तराखंड की राजधानी घोषित की थी. 2022 में भी सूबे में भाजपा सरकार है लेकिन मुखिया बदल गए है. नए मुखियां पुष्कर सिंह धामी ने कुर्सी पर बैठते ही त्रिवेंद्र के कई फैसलों को बदल दिया. जिसमे गैरसैण कमिश्नरी के फैसले पर रोक भी शामिल था. अब धामी सरकार के बजट सत्र को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण में आयोजित ना कराकर देहरादून में आयोजित कराने के बाद यह सवाल खड़े हो रहे. इसके पीछे दलील दी जा रही है चारधाम यात्रा का अपने पीक पर होना. सरकार जब ग्रीष्मकाल में यंहा सत्र नहीं करा रही है तो मानसून और शीतकाल के सत्र का तो यंहा सोचा भी नहीं जा सकता.हैं.शायद यही वजह है की नए मुखिया पुष्कर सिंह धामी को त्रिवेंद्र सिंह रावत की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण गैर सी महसूस हो रही है.ऐसे में उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े होने लाजमी है
सदन में निंदा प्रस्ताव लाएंगी कांग्रेस !
धामी सरकार ने बजट सत्र को पहले 7 जून से गैरसैण में ही कराने की घोषणा की गई थी. लेकिन कुछ माननीयों ने चारधाम यात्रा की दलील दी तो सरकार ने तुरंत ही इसे देहरादून में 12 जून से आयोजित कराने की घोषणा कर डाली. जिसके बाद सरकार की मंशा पर उठ रहे सवालों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी सरकार पर हमलावर हो गए. उन्होंने धामी सरकार के बजट सत्र को गैरसैण में न करना विधान सभा और उत्तराखंड की जनता का अपमान बताया. उन्होंने कहा की गैरसैण में बजट सत्र न करने को लेकर किसी तरह का कोई बहाना नहीं चलेगा. उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से विधानसभा सत्र में इसको लेकर निंदा प्रस्ताव और विशेषाधिकार के हनन का प्रस्ताव सदन में पेश करने को कहेंगे.

