Gujarat Chunavi Dangal: हार्दिक ने मारी पलटी- पहले शाह को बताया जनरल डायर आज उन्हीं की पार्टी में चले

गुजरात चुनावGujarat Chunavi Dangal: हार्दिक ने मारी पलटी- पहले शाह को बताया जनरल...

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Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को लगाई जा रही अटकलों पर विराम लग गया है और आज यह भाजपाई रंग में रंग जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह 9 बजे हार्दिक पटेल दुर्गा पूजा में शामिल होंगे और उसके बाद यह भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे और भाजपाई बन जाएंगे। भाजपा से जुड़ने के बाद हार्दिक पटेल के जीवन मे राजनीति एक नए पड़ाव से आरंभ होगी। क्योंकि आज से पहले गुजरात की जनता ने हार्दिक को भाजपा का विरोध करते देखा है और हार्दिक भाजपा के सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़े रहे हैं। 

अगर हम हार्दिक के राजनीतिक करियर की बात करें तो आरम्भ में यह पाटीदार संगठन सरदार पटेल ग्रुप से जुड़े और यही से इन्होंने राजनीति में कदम रखा। साल 2015 में इन्होंने पाटीदार आरक्षण को लेकिन सरदार पटेल संगठन के साथ रैली निकाली और भारतीय जनता पार्टी का जमकर विरोध किया। हार्दिक पटेल के ऊपर इस रैली के बाद भाजपा के दफ्तर में तोड़फोड़ करने का आरोप लगा और कोर्ट ने इन्हें दोषी बताते हूए 2 वर्ष की सजा सुनाई। हाई कोर्ट के फैसले को उस समय हार्दिक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और इनकीं सजा पर रोक लगा दी गई। 

लेकिन इस कोर्ट कचहरी के मामले ने गुजरात मे हार्दिक को पटेल समाज का ब्रांड बना दिया और भाजपा के विरोध से इन्होंने अपनी अच्छी पहचान बना ली। सरदार पटेल संगठन ने पाटीदार आरक्षण की रैली जब सूरत से निकाली तो हार्दिक ने उसका नेतृत्व किया और वह वहाँ से 3 लाख पाटीदार नेताओ के हीरो बन गए रैली में पहुंचे 3 लाख लोगों ने हार्दिक का समर्थन किया और उन्हें पाटीदार हितैषी के रूप में विख्यात कर  दिया। 

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पाटीदार आरक्षण आंदोलन के चलते सरकार का कड़ा विरोध लर रहे हार्दिक पटेल और उनके नेतृत्व में  पाटीदार समाज के लोग अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड में ही जम गए थे। यहां उनपर पुलिस ने लाठीचार्ज किया जिसके चलते पाटीदार समाज और तत्कालीन सरकार की व्यवस्था के मध्य हिंसा भड़क उठी। अगजनी हुई तोड़फोड़ हुई और 14 पाटीदार समाज के युवकों की मौत हो गई। इस हिंसा के बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल पर राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ लेकिन उन्होंने हार न मानी और वह भाजपा को नीचा दिखाते रहे और उसका विरोध करते रहे। 

इस विरोध में हार्दिक पटेल ने अमित शाह की कड़ी आलोचना की और उनकी तुलना अंग्रेजी सत्ता के दौरान क्रूर जनरल डायर से की। भीषण उथल पुथल के बाद गुजरात की सत्ता में एक परिवर्तन हुआ और मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को 2017 के चुनाव से पहले इस्तीफा देना पड़ा और विजय रुपाणी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया। वही वर्ष 2017 में हार्दिक की मुलाकात राहुल गांधी से हुई।

कांग्रेस ने कपिल सिब्बल को भेजकर इस पर चर्चा भी की थी कि पाटीदार समाज को किस तरह संविधान के अनुरूप आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है। लेकिन इस समय तक हार्दिक पटेल राजनीति में अपना वर्चस्व स्थापित कर चुके थे बस उन्हें सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनना बाकी था और इसी कड़ी में कदम उठाते हुए हार्दिक पटेल ने 2019 को कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस ने 2020 में उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष का पद दिया लेकिन यही से हार्दिक और पार्टी के कुछ लोगों के मध्य मतभेद हो गया और मतभेद इतना बढ़ गया की वर्ष 2022 में हार्दिक ने कांग्रेस का दामन छोड़कर उस पार्टी में जाने का मन बना लिया जिसके विरोध से उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई थी।

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