देहरादून। उत्तराखंड की रोडवेज बस की दिल्ली में एंट्री पर वैन लग जाएगा। इससे उत्तराखंड रोडवेज की 200 बसों के पहिए थम जाएंगे। बता दें कि करीब 250 से अधिक बसें प्रतिदिन दिल्ली से उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के बीच चलती हैं। दिल्ली सरकार ने उत्तराखंड रोडवेज को एक पत्र भेजा है। जिसमें कहा है कि अब दिल्ली के भीतर सिर्फ बीएस—6 बसों को भी एंट्री करने की अनुमति होगी। उत्तराखंड रोडवेज के पास बीएस—6 मानक वाली बसों की संख्या काफी कम है। उत्तराखंड के पास बीएस—6 मानकों की मात्र 50 बसें ही हैं। इनमें बीएस-6 मानक वाली 22 वॉल्वो बस हैं और इसके अलावा कुछ अनुबंधित बसें हैं।
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बता दें कि विशेष आयुक्त दिल्ली परिवहन विभाग ओपी मिश्रा की तरफ से उत्तराखंड रोडवेज को एक पत्र भेजा गया है। जिसमें कहा है कि दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए अब एनजीटी ने निर्देश दिए थे कि एक अप्रैल 2020 के बाद दिल्ली में बीएस-4 वाहनों की कोई खरीदारी नहीं होगी। अब दिल्ली में केवल बीएस-6 वाहन संचालित होंगे। इसके अलावा,एनजीटी ने पहले निर्देश दिया था कि 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को चलने की अनुमति नहीं होगी। बता दें कि दिल्ली का पूरा परिवहन विभाग अब सीएनजी आधारित हो चुका है।
इस लिहाज से एक अक्तूबर 2022 से दिल्ली में अन्य राज्यों की बीएस-4 बस को एंट्री नहीं मिलेगी। दिल्ली में केवल बीएस-6 रोडवेज बसों को ही एंट्री मिल सकेगी। पत्र के बाद परिवहन निगम ने तैयारी शुरू कर दी है। बता दें कि रोडवेज 250 बसों का संचालन उत्तराखंड से दिल्ली रूट पर करता है। दिल्ली सरकार से मिले पत्र के बाद अब रोडवेज विभाग 141 बीएस-6 बसें खरीदने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए टेंडर निकला जा चुका है।
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बीएस का मतलब भारत स्टेज है। इसका संबंध प्रदूषण के लिए जिम्मेदार उत्सर्जन मानकों से होता है। बीएस-6 इंजन से लैस वाहन में खास फिल्टर होते हैं। जिसमें 80-90 प्रतिशत पीएम 2.5 जैसे कण रोकने की क्षमता होती है। इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड पर नियंत्रण लगता है। जिसके कारण प्रदूषण पर रोक लगेगी। ऑटो एक्सपर्ट के अनुसार बीएस-6 वाहनों से हवा में प्रदूषण के कण 0.05 से घटकर 0.01 हो जाते हैं।

