कोर्ट में पेशी और डीएनए जांच से बच रहे विधायक

उत्तराखंडकोर्ट में पेशी और डीएनए जांच से बच रहे विधायक

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कोर्ट में पेशी और डीएनए जांच से बच रहे विधायक

यौन शोषण के आरोपी विधायक महेश नेगी को 15 अप्रैल तक राहत
भाजपा विधायक ने डीएनए जांच के खिलाफ ने हाईकोर्ट में दी है एप्लिकेशन

देहरादून। द्वाराहाट से भाजपा विधायक महेश नेगी को अपनी बच्ची का पिता बताने वाली महिला ने अपनी बेटी का भरण पोषण विधायक से दिलाने की मांग करते हुए देहरादून की फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। बुधवार को होेने वाली सुनवाई में निजी कार्यों का हवाला देते हुए विधायक फैमिली कोर्ट मेें पेश नहीं हुए। वहीं देहरादून सीजेएम कोर्ट में चल रहे यौन शोषण और बच्ची का पिता होने के मामले में विधायक ने अभी तक डीएनए जांच भी नहीं करायी है। यौन शोषण के मामले में फंसे उत्तराखंड के विधायक महेश नेगी को आज फैमिली कोर्ट ने 15 अप्रैल तक की राहत भले ही दे दी हो मगर कोर्ट में पेशी और डीएनए जांच से बचने के प्रयास विधायक पर सवाल उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि एक महिला ने विधायक महेश नेगी पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए उनको अपनी बच्ची का पिता बताया है। महिला ने विधायक पर अलग-अलग जगह ले जाकर उसका यौन शोषण का आरोप भी लगाया है। महिला ने कोर्ट से विधायक की डीएनए जांच करा कर अपनी बेटी के डीएनए से मिलान कराने की मांग की थी। देहरादून सीजेएम कोर्ट मंे चल रहे इस मामले में सीजेएम कोर्ट में पेश होने से बचते हुए विधायक ने अभी तक डीएनए जांच भी नहीं करायी है। वहीं विधायक महेश नेगी ने डीएनए जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की है जिस पर अभी सुनवाई होना बाकी है। इस मामले में विधायक महेश नेगी की पत्नी रीता नेगी उक्त महिला पर ब्लैकमेलिंग के मामले में थाना नेहरू काॅलोनी में मुकदमा दर्ज करवाया था। जिसके बाद महिला ने अपनी बच्ची का पिता महेश नेगी को बताते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था।

विधायक महेश नेगी पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले महिला ने 27 जनवरी को पीड़ित महिला ने बच्ची के भरण पोषण के लिए देहरादून फैमली कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। महिला का कहना था कि उक्त बच्ची के पिता विधायक महेश नेगी हैं इसलिये उन्हें बच्ची के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठानी चाहिये। इस मामले में बुधवार को देहरादून के फैमिली कोर्ट में सुनवाई होनी थी। मगर निजी कार्यो का हवाला देते हुए विधायक फैमिली कोर्ट में पेश नहीं हुए। विधायक के अधिवक्ता राजेन्द्र भट्ट द्वारा दी गयी एप्लीकेशन पर फैमिली कोर्ट ने 15 अप्रैल तक की राहत दे दी है।

फैमिली कोर्ट से मिली फौरी राहत से विधायक महेश नेगी भले ही राहत की सांस ले रहे हों मगर इस प्रकरण से उनकी और पार्टी की छवि धूमिल जरूर हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि महिला के आरोप झूठे हैं तो विधायक डीएनए जांच से बचने का प्रयास क्यों कर रहे हैं। वह डीएनए जांच कराकर सच को सामने क्यों नहीं लाते। या वह सच को सामने लाना ही नहीं चाहते इसलिये जांच को लटकाने का प्रयास कर रहे हैं।

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