बाघों और हाथियों की संख्या बढ़़ने से वन विभाग चिंतित

उत्तराखंडबाघों और हाथियों की संख्या बढ़़ने से वन विभाग चिंतित

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जिम कार्बेट नेशनल पार्क में बाघ और प्रदेश में हाथियों की बढ़ गयी है संख्या
बाघों और हाथियों की संख्या को क्षेत्रफल के हिसाब से पुर्ननिर्धारित करने बन रही योजना

सुनील शर्मा

उत्तराखंड। बाघों और हाथियों के संरक्षण के लिये देश भर में अनेक योजनाएं संचालित की जाती हैं। कोशिश रहती है कि बाघों और हाथियों की संख्या में बढ़ोतरी हो सके। लेकिन बात करें उत्तराखंड के जिम कार्बेट नेशनल पार्क की तो यहां बाघों की संख्या में इजाफा होने से वन विभाग की परेशानी बढ़ गयी है।

यदि बाघों की संख्या बढ़ती रही तो पार्क में क्षमता से अधिक बाघों को नियंत्रित करना मुश्किल होता जायेगा। वहीं प्रदेश में हाथियों की संख्या में इजाफा होने से क्षेत्रफल कम होने की चिंता भी विभाग को सता रही है। अब उत्तराखंड का वन विभाग क्षेत्रफल के हिसाब से काॅर्बेट व राजाजी पार्क (टाइगर रिजर्व) में बाघों और हाथियों की संख्या को पुर्ननिर्धारित करने की कार्य योजना बना रहा है।

राजाजी नेशनल पार्क में शिफ्ट किये जा सकते हैं बाघ
उत्तराखंड के जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क में का कुल क्षेत्रफल करीब 1230 वर्ग किलोमीटर है। वन विभाग की नीतियों के हिसाब से इतने क्षेत्रफल में 238 बाघ होने चाहिए। लेकिन काॅर्बेट पार्क में बाघोें की संख्या बढ़कर 252 हो गयी है। इस हिसाब से जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क में क्षमता से 14 बाघ अधिक रहते हैं। वन विभाग की चिंता यह है कि यदि बाघों की संख्या इसी प्रकार बढ़ती रही तो खाने और वर्चस्व की जंग में बाघों की बीच टकराव होना संभव है। वहीं भोजन की कमी से बाघ आबादी क्षेत्र की ओर भी जा सकते हैं। ऐसे हालात पैदा होने से पहले बाघों की संख्या को क्षेत्रफल के अनुरूप करने के लिये ववन विभाग ने एक समिति बनाई है। सूत्रों के अनुसार वन विभाग की निगाह राजाजी नेशनल पार्क पर जाकर टिकी है जहां 820 वर्ग किलोमीटर एरिया में करीब 37 बाघ रहते हैं। राजाजी नेशनल पार्क की क्षमता 87 बाघ की होने के कारण अभी वहां 50 बाघ और रखे जा सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क से बाघों को राजाजी नेशनल पार्क में शिफ्ट कर संख्या संतुलन बनाया जा सकता है।

1534 हो गई प्रदेश में हाथियों की संख्या
बाघों के साथ प्रदेश में हाथियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेेश में हाथियो की संख्या बढ़कर 1534 हो गयी है। क्षेत्रफल के हिसाब से हाथियों की संख्या अधिक हो जाने से हाथियों को भोजन आदि की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। देखा गया है कि भूखे हाथी भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में घुस कर जान-माल को हानि पहुंचाते हैं। इस आशंका से चिंतित वन विभाग हाथियों की संख्या को नियंत्रित करने के लिये भारतीय वन्यजीव संस्थान विभाग के साथ वार्ता-बैठक कर विशेष कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

इस संबंध में वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत ने बताया कि जिम काॅर्बेट नेशनल पार्क में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गयी है। वहीं प्रदेश में हाथियों की संख्या में हुए इजाफे से क्षेत्रफल कम हो गया है। ऐसे में बाघों और हाथियों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ेगा और वह आबादी क्षेत्र की ओर रूख करेंगे। ऐसे में मानव-वन्यजीव के बीच संघर्ष होने की और जान-माल की हानि होने की आशंका बनी रहती है। बाघों और हाथियों की संख्या को नियंत्रित करने के लिये कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही योजनानुसार धरातल पर कार्य किया जायेगा।

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