- कोविड-19 की पाबंदियों ने किया पर्यटन उद्योग को प्रभावित
- पर्यटक करा रहे बुकिंगों को कैंसिल, कारोबारी चिंतित
सुनील शर्मा
देहरादून। प्राकृतिक संपदा से भरपूर उत्तराखंड के लिये पर्यटन उद्योग सबसे अधिक राजस्व दाता है। राज्य में आने वाले पर्यटक उत्तराखंड के लिये कारोबार की असीमित संभावनाएं लेकर आते हैं। देखा जाये तो पर्यटन उद्योग उत्तराखंड की संजीवनी है। मगर पिछले साल कोरोना संक्रमण के चलते लगे लाॅकडाउन के कारण प्रभावित हुआ पर्यटन उद्योग अब तक पटरी पर नहीं आ पाया था। और अब कोरोना की दूसरी लहर ने फिर से पर्यटन उद्योग को बरबादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। राज्य में बढ़ता कोरोना संक्रमण और लगायी जा रही पाबंदियों के चलते पर्यटक उत्तराखंड की ओर रूख करने से कतरा रहे हैं। ऐसे हालात में पर्यटन कारोबारियों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गयीं हैं।
अप्रैल से लेकर जून तक का समय उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग के लिये बड़ी राहत और कारोबार करने का अवसर लेकर आता है। खासकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के पर्यटक गर्मियों की छुट्टियों में पहाड़ों की ओर रूख करते हैं और उनके आगमन से पहाड़ों की रौनक बढ़ जाती है। मगर पिछले साल मार्च में लगे लाॅकडाउन के कारण पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद कुंभ मेला भी बंदिशों के हवाले रहा और पर्यटकों की आमद कम होने से कारोबारियों को मुनाफा नहीं हुआ। अब होटल-रिजाट्र्स सहित पर्यटन कारोबारियों को आशा थी कि गर्मियों का सीजन उनके लिये राहत लेकर आयेगा और पर्यटकों से पहाड़ फिर से गुलजार हो जायेंगे।
लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण और सरकार-प्रशासन द्वारा कोविड गाइडलाइन की बंदिशों ने पर्यटकोें की आमद पर ब्रेक लगा दी है। हालात यह हैं कि महीनों पहले नैनीताल, मंसूरी, रामनगर, भवाली, भीमताल के होटलों में बुकिंग करा चुके पर्यटक अब यहां आने से कतरा रहे हैं। हर दिन पर्यटक अपनी बुकिंग कैंसल कराते जा रहे हैं जिससे यहां के पर्यटन कारोबारियों की चिंताएं बढ़ गयी हैं। होटल कारोबारियोें का कहना है कि अब तक 40 प्रतिशत बुकिंग रद कराई जा चुकी हैं। इन हालातों में और भी बुकिंग कैंसिल होने का अंदेशा होटल कारोबारियों को सता रहा है। वहीं पर्यटन कारोबार से जुड़े रेस्टोरेंट, टैक्सी और नाव चालक, स्ट्रीट वेंडर्स भी बुकिंग कैंसिल होने से परेशान हैं। क्योंकि पर्यटक ही नहीं आये तो उनकी आजीविका पर संकट आना तय माना जा रहा है। चारधाम यात्रा पर भी कोरोना का ग्रहण जारी रहने के अंदेशे से उत्तराखंड का पर्यटन उद्योग सहमा हुआ है।
पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि उत्तराखंड के लिये पर्यटन सबसे बड़ा उद्योग है। सरकार को कोविड से लोगाें की सुरक्षा करने के लिये आवश्यक कदम अवश्य उठाने चाहियें मगर पर्यटन उद्योग को जीवित रखने के बारे में भी ध्यान देना चाहिये। मार्च 2020 से लगातार नुकसान का सामना करते आये पर्यटन उद्योग को राहत देने के लिये सरकार को गाइडलाइन तय करते समय पर्यटकों को छूट देनी चाहिये। पीक सीजन में यदि पर्यटक उत्तराखंड में नहीं आये तो सरकार और कारोबारियों को काफी नुकसान होना तय है।

