लखनऊ: 2022 विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। वोटिंग से कुछ दिन पहले बीजेपी को झटके पर झटके लग रहे हैं। बीते तीन दिनों में यूपी की योगी सरकार और बीजेपी में जिस तरह से पिछड़े वर्ग के विधायकों और मंत्रियों के इस्तीफों की झड़ी लगी है, उससे बीजेपी में तूफानी लहरे उफान पर है। ऐसे में अब पार्टी डैमेज कंट्रोल करने में जुट गई है। केंद्रीय नेतृत्व ने इस डैमेज कंट्रोल को संभालने की जिम्मेदार डिप्टी सीएम केशव मौर्य को दी है।
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यूपी भाजपा ने ट्विटर हैंडल से पिछड़ों को साधते हुए ट्वीट किया है। जिसमें लिखा है कि ‘ भाजपा सरकार ने रखा पिछड़े वर्ग का मान सम्मान। ओबीसी आयोग को मोदी सरकार ने दिया संवैधानिक दर्जा। मोदी मंत्रीमंडल में ओबीसी समाज के 27 सदस्यों को दी जगह। योगी सरकार में बने 23 ओबीसी मंत्री।
यूपी भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हमला करते हुए लिखा है कि ‘राष्ट्रीय OBC आयोग को सात दशक तक कांग्रेस और उसकी सत्ता में भागीदार रहे SP-BSP जैसे दलों ने लटकाया, अटकाया और भटकाया। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को प्रदान किया संवैधानिक दर्जा। पिछड़ों की आड़ में सिर्फ अपने ‘परिवार’ की राजनीति करने वालों को जनता को जवाब देना चाहिए’। उसे देखते हुए अटकलें लग रही हैं कि अभी और इस्तीफे भी हो सकते है. सूत्रों से ऐसा पता चला है कि एक दर्जन विधायकों की लिस्ट है। जो बीजेपी छोड़ सकते हैं। जिसमे एक और मंत्री शामिल हो सकते है।
बता दें, स्वामी प्रसाद मौर्य, धर्मसिंह सैनी और दारा सिंह चौहान पिछड़े वर्ग से आते है। यही नही इन तीनों मंत्रियों के साथ इस्तीफा देने वाले लगभग सभी विधायक पिछड़े समाज से ही हैं। ऐसे में अब भाजपा ओबीसी वर्ग को साधने में एक बार फिर मजबूती से जुट गई है।
आंकड़ों के मुताबिक 2017 के विधानसभा चुनाव में 10 फीसदी यादव मतदाताओं ने, 57 फीसदी कोइरी-कुर्मी और 61 फीसदी अन्य ओबीसी मतदाताओं ने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को वोट किया था। वहीं सपा और उसके सहयोगी दलों को 2017 के विधानसभा चुनाव में 66 फीसदी यादवों, 18 फीसदी कोइरी-कुर्मी और 12 फीसदी अन्य ओबीसी जातियों ने वोट किया था।
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बीजेपी जानती है कि 2017 में ओबीसी मतदताओं ने खासकर गैर यादव ओबीसी ने दिल खोल कर उसे वोट किया था। जिसकी एक वजह ये सभी नेता भी रहे थे जिन्हें 2017 के चुनाव से पहले बीजेपी अन्य दलों से तोड़ कर लाई थी और वर्तमान में बागी हो चुके हैं। तो संभावना है कि बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है। जिसे लेकर अब एक नई रणनीति के तहत भाजपा के नेता ओबीसी को लुभाने और मोदी-योगी सरकार द्वारा उनके लिए किए गए कार्यों को जोर सोर से उठाना शुरू कर दिया है।

