आखिरकार आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अपना कैंडिडेट फाइनल कर ही लिया और यह उम्मीदवार यादव परिवार के धर्मेंद्र यादव ही हैं। इस सीट पर पिछले कई दिनों से सपा की ओर से कई नाम सामने आये थे। पहले यहाँ से अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव का नाम चल रहा था, बाद में सुशील आनंद का नाम सामने आया। कल रात में एकबार फिर डिंपल यादव को यहाँ से उतारने की खबर चली लेकिन सुबह सुबह होते समाजवादी पार्टी ने घर का ही उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया और धर्मेंद्र यादव के नाम पर मुहर लगा दी। खबर है कि धर्मेंद्र यादव लखनऊ से आज़मगढ़ के लिए निकल चुके हैं।
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धर्मेंद्र यादव इससे पहले भी मैनपुरी से एक बार और बदायूं से दो बार सांसद बन चुके हैं। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री लेने वाले धर्मेंद्र यादव रिश्ते में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के कज़िन भाई लगते हैं। दरअसल भाजपा ने इस सीट से भोजपुरी फिल्मों के स्टार निरहुआ को एकबार फिर मैदान में उतारा है और मुसलमानों में पकड़ रखने वाले गुड्डू जमाली को बसपा ने उम्मीदवार बनाया है, ऐसे में मुलायम परिवार ने यही बेहतर समझा कि किसी घर के आदमी को ही मैदान में उतारना ठीक रहेगा।
बता दें कि निरहुआ पिछली बार भी यहाँ से चुनाव लड़े थे और साढ़े तीन लाख से ज़्यादा वोट हासिल किये थे, इसलिए सपा उन्हें हलके में तो बिलकुल भी नहीं ले सकती, वहीँ विधानसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव की मुस्लिम विरोधी होने की एक इमेज बनाने की भी कोशिश हुई है जिसका परिणाम आज़मगढ़ के उपचुनाव में दिख सकता है। मायावती ने यहाँ से गुड्डू जमाली को इसीलिए उतारा है कि दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन को एकबार फिर मज़बूत किया जा सके।
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अखिलेश को भी मायावती की यह चाल नज़र आ रही है तभी उन्होंने दलित वाला फार्मूला त्याग दिया है और अपने पुराने MY फॉर्मूले पर वापस आये हैं। वहीँ रामपुर की सीट से आजमखान की धर्मपत्नी तज़ीन फातिमा के नाम पर अंतिम मोहर लग गयी है, भाजपा ने यहाँ से घनश्याम लोधी को उम्मीदवार बनाया है , बसपा ने यहाँ से कोई कैंडिडेट नहीं उतारा है जबकि कांग्रेस पार्टी ने इन उपचुनावों में अपने हाथ ही खड़े कर दिए हैं।

