रुद्रप्रयाग। सावन माह भगवान् भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना है शायद यही वजह है कि शिव भक्ति के लिए सावन माह महत्वपूर्ण माना जाता है. आज हम आपकोभगवान् भोले नाथ के ऐसे मंदिर के बारे में बताते है जंहा भगवान् शंकर अलकनंदा नदी के किनारे एक गुफा में विरजमान है. कोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बना हुआ है. मंदिर को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं है. जिसके चलत महाशिवरात्रि पर यँहा दूर दूर से भक्त यहाँ दर्शन को पहुँचते है.
उत्तराखंड में भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका इतिहास हजारों साल पुराना है. आज हम एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में जानेंगे, जो पहाड़ों के बीच अलकनंदा नदी के किनारे पर एक गुफा में स्थित है. इसे कोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. कोटेश्वर महादेव मंदिर रुद्रप्रयाग से करीब 3 किमी दूर स्थित है. राज्य के चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर जाने वाले भक्त जो भक्त इस मंदिर के दर्शन जरूर करते हैं.
सावन माह में 12 ज्योतिर्लिंगों के साथ ही इस प्राचीन शिव मंदिर में भी भक्तों की भीड़ लगी रहती है. कोटेश्वर महादेव मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी पसंद आता है.कोटेश्वर महादेव मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएँ प्रचलन मे है. माना जाता है कि प्राचीन काल में भगवान शिव केदारनाथ जाते समय इस गुफा में ठहरे थे. मंदिर के आस-पास देवी पार्वती, गणेश, हनुमान के साथ ही अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं. हर साल महाशिवरात्रि पर यहां हजारों भक्त पहुंचते हैं. सावन माह में भी काफी शिव भक्त यहां दर्शन करने आते हैं।

