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Fixed Deposit: FD मुनाफे का सौदा? जाने एफडी के ब्याज और महंगाई का गणित

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Fixed Deposit: निवेशक अपना पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में डालकर बढ़ती महंगाई (मुद्रास्फीति) से अधिक पैसा नहीं कमा सकते। बहुत से लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश इसलिए करते हैं क्योंकि उनको गारंटी रिटर्न चाहिए होता है। उन्हें बैंकों से बढ़ी ब्याज दरें मिल रही होती हैं। कई लोग इस बात को नजरअंदाज करते हैं कि टैक्स कटने के बाद उन्हें मिलने वाला रिटर्न अक्सर बढ़ती कीमतों (मुद्रास्फीति) को झेलने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अपेक्षित मुद्रास्फीति दर से कम

फंड्सइंडिया के विश्लेषण में दिए आंकड़ों के मुताबिक, भले हाल में बैंकों की एफडी पर ब्याज दरें बढ़ी हैं। लेकिन टैक्स चुकाने के बाद लोगों को मिलने वाला रिटर्न अभी वित्तीय वर्ष 2024 के लिए अपेक्षित मुद्रास्फीति दर से कम ही है। जो कि 5.4 प्रतिशत है। आमतौर पर, लोग अपना पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट में डालकर बढ़ती महंगाई (मुद्रास्फीति) से अधिक पैसा कमाने की सोचते हैं। लेकिन बैंक एफडी के बारे में अच्छी बात यह है कि वहां पैसे सुरक्षित है। अगर बैंक दीवालिया हो गया, तो भी पैसा DICGC (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन) द्वारा प्रति व्यक्ति 5 लाख रुपए तक सुरक्षित है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर लगभग 7.5% प्रति साल है। इसलिए, यदि फिक्स्ड डिपॉजिट में 1,00,000 रुपए हैं, तो ब्याज में 7,500 रुपए कमाएंगे। लेकिन अगर 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो टैक्स के रूप में 2,340 रुपए का भुगतान करना होगा। जिससे शुद्ध ब्याज के रूप में 5,160 रुपए ही बचेंगे। अब, जब मानते हैं कि मुद्रास्फीति लगभग 5.5 प्रतिशत है। तो 5.16 प्रतिशत का शुद्ध ब्याज (टैक्स कटने के बाद) जीवनयापन की बढ़ते खर्च को बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पैसा बढ़ाने का सुरक्षित तरीका

ऊपर दिए उदाहरण को देखते हुए, फिक्स्ड डिपॉजिट 30 फीसद या हाई स्लैब में टैक्सपेयर्स को कोई खास लाभ नहीं देते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट गारंटी रिटर्न के साथ पैसा बढ़ाने का एक सुरक्षित और विश्वसनीय तरीका है। यदि पैसा गंवाने की आशंका के बिना कमाना चाहते हैं तो यह बढ़िया विकल्प है। हालांकि, महंगाई को मात देने के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प नहीं हैं। खासकर यदि हाई टैक्स दायरे में हैं। मुद्रास्फीति बढ़ने पर (और इसके विपरीत) फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ती हैं। जब टैक्स को ध्यान में रखते हैं, तो कमाई ब्याज की वास्तविक राशि आमतौर पर उस दर से कम होती है। जिस दर से कीमतें बढ़ रही हैं।

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