किन्नर साधु-संतों का आशीर्वाद पाने को श्रद्धालु ललायित

उत्तराखंडकिन्नर साधु-संतों का आशीर्वाद पाने को श्रद्धालु ललायित

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पहली बार हरिद्वार के कुंभ मेले में शामिल हुआ है किन्नर अखाड़ा
11 मार्च को महाशिवरात्री पर होने वाले शाही स्नान में लेगा भाग

हरिद्वार। हरिद्वार के कुंभ मेले में पहली बार शामिल हुए किन्नर अखाड़ा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हरिद्वार के कुंभ मेले में स्नान करने को जितना उत्साहित किन्नर अखाड़े से जुड़े लोग हैं उतने ही उत्साहित उन्हें देखने, उनका आशीर्वाद पाने और उनके साथ सेल्फी लेने के लिये मेले में आने वाले लोग भी हैं। जहां साधु-संत गेरुआ या सफेद कपड़ों में नजर आते हैं वहीं नागा साधु दुनिया से बेखबर अपने अलग ही अंदाज के लिये जाने जाते हैं। इसके विपरित किन्नर अखाडे़ के लोग चटख रंगों वाली पोशाक पहनने से लेकर जेवरात तक धारण करते हैं। शरीर पर बने बड़े-बड़े टैटू और भारी मेकअप उनको बाकी साधुओं से अलग दिखाता है।

हरिद्वार में इन दिनों किन्नर अखाड़ा से जुड़े किन्नर साधु-संतों का आगमन जारी है। सनातन धर्म का प्रचार करने वाला किन्नर अखाड़ा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इससे पूर्व प्रयाग और उज्जैन में हुए कुंभ मेले में शामिल हो चुके किन्नर अखाडे़ के लिये यह पहला अवसर है जब वह हरिद्वार के कुंभ मेले में शामिल हुए हैं। किन्नर अखाड़े को मान्यता दिये जाने का काफी विरोध भी हुआ लेकिन जूना अखाड़े के समर्थन से उनको बल मिला। 11 मार्च को महाशिवरात्री पर होने वाले शाही स्नान के लिए भी जूना अखाड़े ने किन्नर अखाड़े को अपने साथ जगह दी है।

बीती 5 मार्च को जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़ा भी पेशवाई में शामिल हुआ था। पेशवाई में पूरे शाही अंदाज में किन्नर साधु संत अपने-अपने रथों पर बैठकर निकले थे। कोई हाथी, ऊंट और घोड़े तो कोई कार और कोई बाइक चला रहा था। किन्नर महांडलेश्वर अपने-अपने रथों पर सवार हीरे-मोती और सोने के आभूषणों के साथ कीमती वेशभूषाएं पहनीं थी। इस पेशवाई को देखने के लिए बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने किन्नर साधु-संतों से आशीर्वाद लिया।

किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी कुंभ में जगह पाने के लिये जूना अखाड़े के हरी गिरि जी के प्रयासों की सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि शुरूआत का समय बड़ा कठिन था। लोग हमें गंभीरता से नहीं लेते थे और अक्सर हमपर कटु कटाक्ष भी किये जाते थे। मगर अब जूना अखाड़े के सहयोग से हमें मान्यता मिली और श्रद्धालु भी हमारे अखाड़े को देखने और किन्नर साधु-संतों का आशीर्वाद पाने को ललायित रहते हैं। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि हरिद्वार के लोगों से मिला प्यार और सत्कार कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने मां गंगा और भगवान शंकर से हरिद्वार की जनता के लिए दुआएं मांगी।

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