खुर्जा: कोरोना काल में दम तोड़ रहा पॉटरी उद्योग

मेरठ रीजनखुर्जा: कोरोना काल में दम तोड़ रहा पॉटरी उद्योग

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खुर्जा: कोरोना काल में दम तोड़ रहा पॉटरी उद्योग

अमित बिश्‍नोई

कोरोना वैश्विक महामारी ने दुनिया में मशहूर खुर्जा की पॉटरी को भी अपनी चपेट में ले लिया है। पॉटरी उद्योग से जुड़े लोगों के सामने कोरोना ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। हालात यह है कि कोरोना काल में दुनिया के टॉप टेन क्लस्टर्स में शामिल इस उद्योग पर भी इन दिनों मंदी छाई हुई है। खुर्जा की पहचान पूरी दुनिया में पॉटरी से हुई है। यहां की पॉटरी के मुरीद लगभग हर देश में मौजूद हैं। यूपी सरकार ने उधोग-धंधों को बढ़ावा देने के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट’ योजना चलाकर संजीवनी देने की कोशिश की थी। इसके बावजूद भी यहां के हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है। चीनी मिट्टी के काम से कई दशकों से जुड़े उद्यमियों में निराशा का माहौल है। खुर्जा में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 800 पॉटरी थी। पॉटरी उद्योग से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन पिछले दो दशकों की उपेक्षा की वजह से हालात बदलते चले गए। वर्तमान में बची हुई लगभग 200 के करीब पॉटरी निर्माण इकाइयां भी कोरोना महामारी की वजह से अपने आस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं। अधिकतर उद्यमी अब इकाइयों को चलाने में अब कतरा रहे हैं।

‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना के लिए खुर्जा के पॉटरी उद्योग चुना गया था। इस उद्योग की एनजीटी के आदेश ने पहले ही कमर तोड़ दी थी। इस बारे में उद्यमी राजीव बंसल कहते हैं कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट’ में जब पॉटरी को जिले में स्थान मिला, तो लगता था कि शायद अब अच्छे दिन आएंगे। कोरोना के बाद अब तो काम समेटने के हालात पैदा हो गए हैं। 2019 में खुर्जा की पॉटरी नगरी को एनजीटी की गाइडलाइन के मुताबिक, तेल से संचालित इकाइयों को बंद करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद सभी इकाईयों को गैस पर संचालित भट्ठी पर अपना माल पकाने को शुरूआत करनी पड़ी।ऐसे में उस समय भी कई इकाइयां में बंद होने के कगार पर आ गई थीं।

खुर्जा के पॉटर्स कहते हैं कि तेल से गैस पर आना काफी महंगा साबित हुआ था। इसके बाद भी उद्यमियों ने हिम्मत दिखाई और वह गैस पर आधारित संयंत्र उन्होंने लगा लिए। इस के बाद जब उभरने का समय आया तो कोरोना महामारी ने दस्तक दे दी। परेशान उद्यमियों और व्यापारियों का कहना है कि न तो इस वक्त हमारे पास मजदूर हैं और न ही कोई खरीददार। इससे हमारे आर्थिक हालत बिगड़ते जा रहे हैं।
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त उद्धव योगेश कुमार का कहना है कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ के अंतर्गत यहां से पॉटरी को चुना गया था। इसके तहत उद्यमियों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा होनहार मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए पॉटरी से संबंधित ट्रेनिंग के भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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