देहरादून। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने 24वीं गिरफ्तारी करते हुए केंद्रपाल सिंह को धर पकड़ा है। जो कि पहले से ज़मानत पर छूटा हुआ था। केंद्रपाल को इस मामले में मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। एसटीएफ कोचिंग इंस्टीट्यूटों को तफ्तीश के रूप में रडार में ले रही है। लेकिन सवाल खड़ा है कि बड़ी मछलियों पर कब कार्रवाई होगी। इस बारे में एसटीएफ जल्द मामले की तह पर पहुंचने का दावा कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस इस पूरे प्रकरण पर सीबीआई जांच को लेकर बड़े आंदोलन के मूड में दिख रही है। केंद्रपाल की गिरफ्तारी की बात करें तो एसटीएफ ने उसे जांच पड़ताल के बाद ही गिरफ्तार किया है। हाकम सिंह के रिसॉर्ट में केंद्रपाल की पार्टनरशिप है। वह 2011 से उसके संबंध इस मामले में दूसरे आरोपियों के साथ पाए गए। हैरान करने वाली बात है कि केंद्रपाल ऑटो चलाने का काम करता है। जिसके संबंध नकल गिरोह के साथ पाए गए। उसकी शातिराना चाल देखिए कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह जमानत तुड़वाकर जेल गया और चुपके से दूसरी जमानत पर रिहा हो गया। जिसे एसटीएफ ने धामपुर से धर दबोचा।
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रिपोर्ट के अनुसार बड़े घोटाले में अब तक हुई गिरफ्तारियों के बाद प्रदेश में संचालित कोचिंग इंस्टिट्यूट अब एसटीएफ के रडार पर हैं। जो पैसों के एवज में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। पेपर लीक मामले में डेल्टा इंस्टिट्यूट में टीचर की भूमिका की जांच के दायरे में मोड़ आ रहे हैं। पेपर लीक मामले में मुखर रहे बेरोजगार संगठन ऐसे इंस्टिट्यूटों की जांच की इच्छा कई बार जता चुके हैं। एसटीएफ के अनुसार 10 से 15 इंस्टिट्यूट एसटीएफ के रडार पर हैं। बेरोज़गार संगठन के अध्यक्ष बॉबी पंवार ने कहा कि दून में धड़ल्ले से चल रहे इंस्टिट्यूटों के रिकॉर्ड चेक किए जाने चाहिए। यूकेएसएसएससी के सचिव एस एस रावत ने कहा कि कोंचिंग इंस्टिट्यूटों पर शिकंजा कसता है तो कई और सफेदपोश सामने आ सकते हैं।

