- बर्गर, पिज्जा, नूडल्स ने बिगाड़ा बच्चों के आईक्यू लेवल का संतुलन
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विभाग की अध्ययन रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
गरिमा जोशी
मेरठ। जंकफूड आपके बच्चों को दिमाग को खा रहा है। स्वाद के चक्कर में माएं अपने बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं। बच्चों की थाली में परोसे जाने वाले बर्गर, पिज्जा, नूडल्स का असर सीधे उनके आई क्यू लेवल पर पड़ रहा है। नतीजन कम उम्र में ही बच्चों की सोचने समझने की क्षमता क्षति ग्रस्त होने लगी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चल रहे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विभाग की अध्ययन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। इस गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक हर महीने तकरीबन 30 फ़ीसदी इसी तरह के रिपोर्ट हो रहे हैं।
विभाग की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक बीते छह महीने में 16 हजार बच्चों पर स्टडी की गई। इनमें 9642 बच्चों में एकग्रता की समस्या पाई गई। इन बच्चों का आई क्यू लेवल बहुत कम मिला। 5632 बच्चों में शारीरिक दुर्बलता और हड्डियों के रोग मिले। जबकि 10822 बच्चों में मोटापा पाया गया। इनमें 10फ़ीसदी बच्चे मधुमेह से ग्रस्त पाए गए। 4 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे इसमें शामिल हैं।
खतरनाक केमिकल से सेहत खराब
चिकित्सक बताते हैं कि बर्गर, नूडल, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक, रोल, आइसक्रीम आदी में कई ऐसे केमिकल शामिल किए जाते हैं जो बच्चों की जीभ को नया स्वाद देती हैं। अजीनोमोटो समेत अन्य केमिकल अपना स्वाद जीभ पर चढ़ा देते हैं और बच्चे इसके एडिक्ट हो जाते हैं। इनके स्वाद के आगे घर का खाना बच्चों को पसंद ही नहीं आता।
कम उम्र में घेर रही डायबिटीज
खान पान की खराब आदतों की वजह से कम उम्र में ही बच्चों को डायबिटीज घेर रहा है। अनियंत्रित मोटापा इसकी सबसे बड़ी वजह है। चिकित्सक बताते हैं कि खाने में हरी सब्जियों, दाल, अनाज का होना बहुत जरूरी हैं। ये भोजन शरीर में आवश्यक सभी पोषक तत्वों की पूर्ति करता हैं। जंक फूड में शामिल केमिकल को पचाने के लिए अग्नाशय को काफी मेहनत करती हैं। कई तरह के पाचन रस का उत्पादन करना पड़ता है। अधिक मेहनत के चलते शरीर का पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है। धीरे धीरे मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है और मोटापा बढ़ने लगता है। जिससे मधुमेह का खतरा काफी बढ़ जाता है।
माता पिता की जागरूकता जरूरी
बाल विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों के खान पान को लेकर माता पिता को हमेशा से ही सजग रहना चाहिए। शुरुआत से ही बच्चों को पौष्टिक खाना परोसे। जंक फूड ने नुकसान उन्हें बताएं। बच्चा अगर रोए, चिल्लाए या इस तरह के खाने के लिए जिद करे तो उसकी जिद पूरी न करें।

