जोशीमठ। भू-धंसाव की चपेट में आए जोशीमठ के लिए आने वाले दिन मुसीबत भरे हो सकते हैं। यदि बारिश हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। भू-धंसाव से बनी दरारें और गहरा सकती हैं। इसके अलावा पानी के नए स्रोत फूट सकते हैं। शासन-प्रशासन इस स्थिति को लेकर अभी से चिंतित है। फिलहाल उसके पास इससे बचने का कोई ठोस प्लान तैयार नहीं है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की आशंका से मना किया है।
मलबे के ढेर में बसा जोशीमठ
जोशीमठ कभी गांव हुआ करता था। जहां पहाडी शैली में बने 15-20 घर हुआ करते थे। आज जोशीमठ में 12390 मकान हैं। इनमें से अधिकांश बहुमंजिला हैं। जिनके बोझ से शहर दबता गया। पूर्व में हुए भूवैज्ञानिक अध्ययनों में जोशीमठ में बढ़ते दबाव को लेकर चेतावनी जारी की गई थी। शासन प्रशासन ने माना है कि शहर का सुनियोजित ढंग से विकास नहीं हुआ है। भवन बिना किसी बायलॉज के बने हैं।
जोशीमठ में खतरनाक स्थित पानी की निकासी की है। ड्रेनेज प्लान नहीं होने से शहर का पानी जमीन में रिसता है। जो अब विभिन्न स्रोतों से बाहर निकल रहा है। बारिश की स्थिति में लोगों को व्यवहारिक परेशानियों से जूझना पड़ेगा। दरारों के जरिए जब यह पानी जमीन में जाएगा। तब नया गुल खिलाएगा। इसको लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
डीबीएस पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व वरिष्ठ भूगर्भ विज्ञानी डॉ. एके बियानी के अनुसार जोशीमठ में अधिक बारिश हुई तो भू-धंसाव की गति बढ़ सकती है। भू-धंसाव के कारण तमाम सीवर टैंक लिकेज होंगे। जिनका पानी बाहर निकलने का रास्ता खोजेगा। बारिश का पानी साथ मिलकर नए स्रोतों को जन्म देगा। इससे भू-कटाव बढ़ेगा। जोशीमठ के अधिकांश ढलान अस्थिर हैं। यह ग्लेशियर के मलब से बने हुए हैं। जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में मोरेन कहते हैं। ऐसी स्थिति में पानी को बाहर निकलने का रास्ता मिलने पर वह मिट्टी बह जाती है और बोल्डर से खाली स्थान बन जाता है।

