20 बरस अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलना कोई मज़ाक नहीं और फिर जब ये कारनामा कोई महिला क्रिकेटर करे तो उसका कद और भी बढ़ जाता है, पिछले दो दशकों से भारतीय महिला क्रिकेट टीम के तेज़ आक्रमण को संभाल रही लम्बे कद की झुलन गोस्वामी ने ऐसा कर अपने लम्बे कद को और बढ़ा दिया। झूलन ने पिछले शनिवार को अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया, इसे भारतीय महिला क्रिकेट विशेषकर गेंदबाज़ी में एक स्वर्णिम दौर का अंत माना जायेगा। इंग्लैंड के खिलाफ अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली झूलन गोस्वामी ने समापन भी इंग्लैंड के खिलाफ ही किया और वहां पर किया जिसे क्रिकेट का मक्का कहा जाता है. लॉर्ड्स पर शनिवार को बड़े भावुक क्षण थे, टीम इंडिया की खिलाडियों की आँखों में आंसू भरे हुए थे क्योंकि उनकी झुलु दी अब उनके साथ मैदान पर नहीं दिखाई देंगी।
एक तेज़ गेंदबाज़ का इतना लम्बा कैरियर अपने आप में एक मिसाल है, आम तौर पुरुषों में किसी तेज़ गेंदबाज़ को दो दशक गेंदबाज़ी करते हुए बहुत कम ही देखा गया होगा, शायद एक भी नहीं। फिर यहाँ तो एक महिला तेज़ गेंदबाज़ ने यह कारनामा किया, सचमुच में यह झूलन का बेमिसाल कारनामा है और शायद ही कोई झूलन के इस रिकॉर्ड को तोड़ सके. दो दशक तक तेज़ गेंदबाज़ी झूलन की महानता को दर्शाता है. भारतीय महिला क्रिकेट में कई दौर गुज़रे और हर दौर किसी न किसी के नाम रहा, फिर चाहे वो शांता रंगास्वामी हों जिन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट को एक पहचान दी, डायना एडुल्जी हों जिन्होंने अपनी स्पिन गेंदबाज़ी से भारतीय महिला क्रिकेट को एक सम्मान दिया, झूलन की साथी मिताली राज हों जिन्होंने विमेंस क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया और भारत को महिला क्रिकेट की एक शक्तिशाली टीम के रूप में डेवलप किया और अब इस पंक्ति में झूलन का नाम हाल ऑफ़ फेम में शामिल हो गया है.
जब कैरियर इतना लम्बा होगा तो रिकार्ड्स की भी भरमार होना लाज़मी है, महिला क्रिकेट में एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं होगा जिसे झूलन ने अपने नाम न किया हो. सबसे ज़्यादा 355 इंटरनेशनल विकेट, सबसे ज़्यादा (255) ODI विकेट, विश्व कप में सबसे ज़्यादा (43) विकेट। ये वो रिकार्ड्स हैं जिन्हें तोड़ पाना किसी भी महिला तेज़ गेंदबाज़ के लिए असंभव सी बात होगी। झूलन का कैरियर 20 बरस और 261 दिन चला, अपने साथी खिलाड़ी मिताली राज से दो बरस पीछे, मिताली ने 22 साल और 274 दिनों का कैरियर हासिल किया था. इस तरह लम्बे कैरियर के मामले में झूलन दुनिया में दूसरे नंबर हैं. मिताली वह खिलाड़ी हैं, झूलन ने जिनके साथ लगभग दो दशक की क्रिकेट खेली। मिताली और झूलन दोनों हमउम्र हैं और दोनों ही भारतीय महिला क्रिकेट क्या पूरी दुनिया की क्रिकेट की शान हैं. एक ने बल्लेबाज़ी में झंडे गाड़े तो दूसरी ने गेंदबाज़ी में.
एक बल्लेबाज़ का इतना लम्बा और कामयाब कैरियर मुश्किल तो बहुत है मगर नामुमकिन नहीं मगर एक तेज़ गेंदबाज़ का इतने साल क्रिकेट खेलना नामुमकिन ही है. मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ कि क्रिकेट की दुनिया की वो ऐसी इकलोती गेंदबाज़ हैं, न पुरुष और न महिला, कहीं भी कोई और नहीं। हाँ बल्लेबाज़ी में बीस बरस या उससे लम्बा कैरियर अबतक चार बल्लेबाज़ों को मिला है जिनमें मिताली को सबसे लम्बा कैरियर नसीब हुआ है, इसके बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का नंबर है जिन्होंने 22 बरस और 91 दिन अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेली, श्रीलंका के जयसूर्या ने 21 वर्ष और 184 दिन और पाकिस्तान के जावेद मियांदाद को 20 बरस 272 दिन का कैरियर मिला.
झूलन गोस्वामी का क्रिकेट कैरियर इतना लम्बा है कि उनके कारनामों पर कई किताबें लिखी जा सकती हैं. फिलहाल झूलन के कैरियर पर अगर नज़र डालें तो एक बात यकीनी तौर पर कही जा सकती है महिलाएं पुरुषों से कम नहीं बल्कि कहीं आगे हैं. क्या कोई पुरुष तेज़ गेंदबाज़ 40वे साल में तेज़ गेंदबाज़ी कर सकता है, शायद नहीं। लेकिन झूलन ने अपने आखरी मैच में भी धारदार गेंदबाज़ी की और दो विकेट हासिल कर साबित कर दिया कि उनमें विकेट लेने की आग अभी भी बरक़रार है. अपनी कटर गेंदबाज़ी और सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर झूलन ने एक कामयाब गेंदबाज़ के रूप में विदाई ली और सबसे बड़ी बात ये रही कि लॉर्ड्स में जीत दिलाकर टीम इंडिया ने अपनी झुलु दी की विदाई को यादगार बनाया। झूलन इसकी हकदार भी थीं.

