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झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद INDIA गठबंधन में बढ़ी तकरार, RJD और वाम दलों पर लगाए धोखे के आरोप

Rahul gandhi

झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद पार्टी नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वाम दलों पर धोखा देने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि गठबंधन के पास कुल 26 वोट थे, लेकिन उन्हें केवल 21 वोट मिले और एक वोट अमान्य हो गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास 16 वोट थे, जबकि JMM के 4, RJD के 4 और CPI(ML) के 2 वोट थे। ऐसे में उन्हें लगता है कि RJD और CPI(ML) का समर्थन नहीं मिला।

उन्होंने कहा, “धोखा वहीं होता है, जहां भरोसा होता है। इस पूरे मामले पर सभी को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।”

झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने भी RJD और वाम दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन दलों ने INDIA गठबंधन को धोखा दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ विधायकों ने पैसे लेकर NDA समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया होगा।

के. राजू ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 16 विधायकों ने प्रणव झा के पक्ष में वोट डाला था।

वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर RJD ने पलटवार किया है। पार्टी ने कहा कि झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे बताते हैं कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन जुटाने में नाकाम रही। RJD ने कहा कि दूसरे दलों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए।

RJD ने यह भी याद दिलाया कि मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा, ओडिशा और बिहार में कांग्रेस के कई विधायकों ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि उन विधायकों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार और NDA समर्थित परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैजनाथ राम को 31 वोट प्राप्त हुए।

निर्वाचन पदाधिकारी रंजीत कुमार के मुताबिक, कुल 81 विधायकों ने मतदान किया। मतगणना के दौरान 78 वोट वैध पाए गए, जबकि 3 वोट रद्द हो गए। इसके बाद निर्वाचन आयोग की सहमति से बैजनाथ राम और परिमल नाथवानी को विजयी घोषित कर दिया गया।

कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद अब INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं, जिससे विपक्षी एकता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

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