Jamiat Ulema-E-Hind Deoband: वतन की सलामती पर कोई आंच आये, मुस्लमान बर्दाश्त नहीं कर सकता: महमूद मदनी

उत्तर प्रदेशJamiat Ulema-E-Hind Deoband: वतन की सलामती पर कोई आंच आये, मुस्लमान बर्दाश्त...

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तौक़ीर सिद्दीक़ी 

Jamiat Ulema-E-Hind Deoband: मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर बढ़ते विवादों और अदालतों में सुनवाई के बीच आज देवबंद में जमीअतुल उल्माए हिन्द (महमूद मदनी गुट) का दो दिवसीय जलसा शुरू हुआ। जलसे को सम्बोधित करते हुए मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मुश्किल को झेलने के लिए ताकत चाहिए और हम कमज़ोर लोग हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं हम डरपोक हैं। अगर जमीअत ने फैसला किया है कि हम ज़ुल्म को बर्दाश्त कर लेंगे, दुखों को सह लेंगे लेकिन अपने मुल्क पर आंच नहीं आने नहीं देंगे तो यह फैसला कमज़ोरी की वजह से नहीं बल्कि जमीअत के फैसले कि वजह से है और यह ताकत हमें कुरान देता है। हम सबकुछ बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अपने ईमान से समझौता नहीं कर सकते।

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महमूद मदनी ने आरएसएस या भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि वह चाहते क्या हैं उनका एक्शन प्लान क्या है, उन्होंने कहा कि इस मुल्क में बसने वाले लोगों में अक्सरियत उन लोगों की नहीं जो नफरत के पुजारी हैं, पहले तो बहुत छोटी संख्या में थे जो इन दिनों ज़्यादा नज़र आ रहे हैं और अगर हमने उन्हीं की भाषा में उन्हें जवाब देना शुरू किया तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जायेंगे। मौलाना ने कहा कि अफ़सोस बस इस बात का है कि मुल्क की खामोश अक्सरियत आज भी इस बात को अच्छी तरह समझती है की नफरतों का बाजार सजाने वाले लोग देश के गद्दार हैं। 

उन्होंने कहा कि आग को आग से नहीं बुझाया जा सकता, नफरत को मोहब्बत से बुझाया जा सकता है। मौलाना ने कहा कि लोग राष्ट्र निर्माण, राष्ट्र सुरक्षा की बातें तो बहुत करते हैं लेकिन ज़ुल्म बर्दाश्त कर लेना, अन्याय अत्याचार को बर्दाश्त कर लेना और चुप रह जाना कोई हमसे सीखे। मौलाना ने कहा कि हम हर चीज़ बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन वतन की सलामती पर कोई आंच आये इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। 

मौलाना एक शेर से पढ़ते हैं:-

अपनी ही बस्ती में हमसे, अपनी ही बस्ती के लोग 
पूछते हैं कौन सी बस्ती के हो क्या नाम है 

मौलाना कहते हैं कि मुसलमानों को इन लोगों ने आज देश में अजनबी सा बना दिया है, मौलाना मदनी सवाल करते हैं बात देश की एकता अखंडता की करते हैं, अखंड भारत की बात करते है और देश के मुसलमानों का सड़क पर चलना दुश्वार कर दिया है। मौलाना ने कहा यह इम्तिहान हम लोगों के सब्र का है। मौलाना यह एलान भी करते हैं कि मौका पड़ा तो हम देश की जेलों को भी आबाद करेंगे। 

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मौलाना ने कहा कि इबादतगाहों पर आज शाम या कल पेश होगी और तबतक कोई भी इस मुद्दे पर बात नहीं करेगा और जमीअत इस मुद्दे पर जो फैसला करेगा हम सबको उसके पीछे चलना होगा। मौलाना ने कहा कि देश को एक नए खून, नए जूनून की ज़रूर की ज़रुरत है जो मुल्क को ग़लत रास्ते पर जाने से बचाये, जो उनकी प्लानिंग को नाकाम बनाये। जो हमारे रिएक्शन को अपनी प्लानिंग से पहले तय कर लेते हैं कि हम यह करेंगे तो मुसलमान यह करेंगे। तुम्हारी बनाई हुई प्लानिंग पर अब नहीं चलेंगे मुसलमान।

मौलाना मदनी ने कहा कि तकनीकी तौर पर भले ही वह अक्सरियत में हैं लेकिन अगर सामान विचार वालों को एक जगह कर दिया जाय तो हम बहुसंख्यक में हैं, आज वह सत्ता में हैं लेकिन सत्ता हमेशा कभी नहीं रहती। अभी शाम को सम्मलेन का दूसरा दौर होगा जिसमें देश के कई और मुस्लिम विद्वान सम्बोधित करेंगे। आज सुबह के जलसे में जो तीन प्रस्ताव पास हुए उनमें 1000 स्थानों पर सद्भावना संसद का आयोजन, इस्लामोफोबिया और मुस्लिमों के खिलाफ उकसावे की घटनाओं पर काबू पाना शामिल हैं।

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