देहरादून। केदारनाथ धाम तक जाने के लिए अभी लोगों को सोनप्रयाग से 7—8 घंटे का समय लगता है। लेकिन अब यह यात्रा सिर्फ 40 मिनअ में पूरी हो सकेगी। जल्द ही रोपवे के लिए काम शुरू होने वाला है। जिसके बाद हर उम्र वर्ग के लोग केदारनाथ धाम की यात्रा कर सकेंगे। रोपवे शुरू हो जाने के बाद केदारनाथ धाम की यात्रा सिर्फ 40 मिनट में पूरी हो सकेगी। श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने केदारनाथ धाम तक रोपवे निर्माण का फैसला किया है। रोपवे निर्माण का काम अब सितंबर 2022 से शुरू करने की तैयारी है। अगले साल मार्च 2023 तक इसके निर्माण काम में तेजी आनी शुरू हो जाएगी। रोपवे निर्माण का काम आगामी तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा। बता दें कि अभी केदारनाथ धाम जाने के लिए दो विकल्प हैं। पहला है पैदल रास्ते से सोनप्रयाग से 7 से 8 घंटे का सफर कर पहुंचा जा सकता है। जबकि दूसरा हेलीकॉप्टर सेवा है। हेलीकॉप्टर सेवा काफी महंगी होने के साथ अधिक मांग होने की वजह से उपल्ब्ध नहीं हो पाती है। इस कारण अधिकांश श्रद्धालु पैदल केदारनाथ जाने का विकल्प उपयोग में लाते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रख सड़क परिवहन मंत्रालय ने रोपवे निर्माण प्रक्रिया शुरू की है। रोपवे निर्माण एनएचएआई की कंपनी एनएचएलएमएल करेगी।
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एनएचएलएमएल के सीईओ प्रकाश गौड़ का कहना है कि सड़क परिवहन मंत्रालय के निर्देश में केदारनाथ रोपवे निर्माण प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। सितंबर तक काम अवार्ड किया जाएगा। निर्माण करने वाली कंपनी को अपनी साइट बनाने में समय लग रहा है। इस तरह संभावना जताई जा रही है कि मार्च 2023 तक निर्माण कार्य पूरी गति के साथ शुरू होगा। पहाड़ी इलाका होने के कारण निर्माण कार्य में काफी समय लगेगा। लेकिन रोपवे का निर्माण कार्य तय समय तीन साल में पूरा किया जाएगा। यानी 2026 से केदारनाथ धाम रोपवे से पहुंच सकेंगे।
सीईओ प्रकाश गौड़ के मुताबिक इस रोपवे में देश में पहली बार विश्व की सबसे सुरक्षित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें थ्री एस ट्राइकेबल तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इसमें केबल कार तीन तारों पर चलेगी। यह तकनीक विश्व में कुछ चुनिंदा देशों में ही है।
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रोपवे की कुल लंबाई 13 किमी होगी। यह सोनप्रयाग से शुरू होकर केदारनाथ तक होगा। रोपवे के सफर में कुल पांच स्टेशन बनाए जाएंगे। जिनमें सोनप्रयाग, केदारनाथ,गौरीकुंड, चिरवासा और लिंटोली होंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट में 22 टॉवर बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 985 करोडर रुपये बताई जा रही है।

