अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड के जेनेवा में चल रही बातचीत के दौरान तनाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक चेतावनी भरी पोस्ट के बाद दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पर असर पड़ा है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने अपने सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पहले से भी बड़ा हमला करेगा।
ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने कड़ा जवाब दिया। ईरान की नेशनल असेंबली के स्पीकर और वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि अगर अमेरिकी धमकियां असरदार होतीं, तो अमेरिका आज इस स्थिति में नहीं होता। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव में नहीं झुकेगा और उसकी सेना हर स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ट्रंप की भाषा पर कड़ा विरोध जताया और कुछ समय के लिए बैठक कक्ष छोड़ दिया। हालांकि, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 82 मिनट तक बातचीत भी हुई।
ईरान की ओर से कहा गया कि बातचीत में उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर में फंसे ईरान के 6 अरब डॉलर भी इस समझौते के तहत वापस किए जा सकते हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) में परमाणु कार्यक्रम को लेकर 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा।
वहीं, ईरान के सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने कहा कि ट्रंप के बयान के बाद बातचीत मुश्किल दौर में पहुंच गई है। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल है और बातचीत छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया गया है।
इस बीच, इजरायल ने भी साफ कर दिया है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के ब्यू-फोर्ट किले वाले इलाके से पीछे नहीं हटेगी।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उनका देश दबाव, धमकी और अपमान के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपने विकास और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अधिकारों को छोड़ने वाला नहीं है।
फिलहाल, जेनेवा में चल रही बातचीत के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता हो पाएगी या नहीं।

