नई दिल्ली। बच्चों और महिलाओं पर खूंखार पालतू कुत्तों के हमलों के बाद भारत के कुछ जिलों में तो खतरनाक नस्ल के कुत्ते पालने पर रोक लगा दी है। लेकिन ऑस्ट्रेलिया में कोरोना महामारी के कारण अर्थव्यवस्था पर ऐसी चोट पड़ी है कि वहां पर लोगों का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। जिसके कारण वे परिवार का पेट ठीक से भर नहीं पा रहे हैं। इस कारण से पालतू जानवरों को भी पालना बंद कर दिया है। आर्थिक परेशानी के चलते ऑस्ट्रेलियाई लोग अपने प्यारे कुत्तों को अब छोड़ रहे हैं।
मेलबर्न में कुत्तों का शेल्टर होम चलाने वालीं सूसन का कहना हैं कि उनके शेल्टर होम में पालतू जानवरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हाल में चार साल का चारकोल (नियपोलिटन मास्टिफ) उनके यहां लाया गया है। जिसे उसके मालिकों ने ये कह छोड़ दिया कि वे उसको नहीं पाल सकते। सूसन बताती है कि तमाम चीजों में महंगाई से दिक्कत काफी बढ़ी है।
कुत्तों के भोजन और अन्य सामानों के दाम तेजी से बढ़े हैं। चारकोल के एक साल के भोजन पर 80 हजार रुपए का खर्च आता हैं। सूसन कहती हैं, हमारे शेल्टर होम में 500 कुत्ते हैं। इन सभी को खिलाना मुश्किल हो रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया में पालतू जानवरों से जुड़े सामान 12 प्रतिशत तक महंगे हुए हैं। खाने-पीने के दाम दोगुनी हो गई हैं पिछले कुछ महीनों में दुनिया में पालतू जानवरों के भोजन के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसमें मांस, अनाज और माइक्रोन्यूट्रियंट्स भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये अब दुनिया की समस्या ये पालतू जानवर बनते जा रहे है।

