नई दिल्ली। पिछले कई महीने से जारी रूस यूक्रेन युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है। वैश्चिक संकट अब दुनिया के हर देश पर दिखाई दे रहा है। इस समय अमेरिका महंगाई की तगड़ी मार के दौर से गुजर रहा है। लेकिन अब अमेरिका भी वैश्चिक संकट के दौर से काफी खौफजदा है। अमेरिका के बाजारों में वैश्चिक संकट का असर नजर आने लगा है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी के साथ ही अन्य टैक्सों में भी इजाफा किया है। वहीं गत गुरुवार को अमेरिकी स्टाक इंडेक्स गिरने का असर भारत सहित दुनिया के देशों पर भी दिखाई दिया। भारत में ही एक झटके में निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए।
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आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस कदम से निवेशकों को आशंका है कि अब मौद्रिक सख्ती लागू होगी। जिसका असर विश्व स्तर पर बड़े पैमाने पर पड़ेगा। दरअसल महंगाई की रफ्तार को रोकने के लिए अमेरिका केंद्रीय बैंक ने 1994 के बाद से ब्याज दर में ना सबसे अधिक वृद्धि की है बल्कि भविष्य में इसके और अधिक बढ़ाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने इस आर्थिक विकास के अनुमान को भी कम किया है।
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बता दें कि इस समय पिछले चार दशकों के बाद अमेरिका में फिलहाल सबसे ज्यादा महंगाई आई है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार जिस तरह के संकेत दिए हैं, उससे मंदी की संभावना तेजी से पैदा हो रही है। विश्व बैंक पहले से आगाह कर चुका है। ड्यूश बैंक और मॉर्गन स्टेनली समेत अन्य बैंकों ने बढ़ते मंदी के जोखिमों को स्वीकारना शुरू का दिया है।

