लखनऊ में इन्वेस्टर समिट में देश के जाने माने उद्योगपतियों को सम्बोधित करने के बाद कानपूर देहात ज़िले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैतृक गाँव परौख पहुँचने पर सभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह चाहते हैं कि देश में एक मज़बूत विपक्ष बने. हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रपति ने पद की सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए हेलिपैड पर पीएम मोदी की अगुवानी की और बाद में प्रधानमंत्री ने भरी सभा में इस बात को सबके सामने उजागर भी किया।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति से इसकी शिकायत भी की थी, मगर उन्होंने कहा कि मैंने मर्यादा नहीं तोड़ी है, मैंने आपका स्वागत इस गाँव के बेटे के रूप में किया है. प्रधानमंत्री ने इस तरह से मर्यादा तोड़ने की इस बात को अपनी बातों से सही ठहरा दिया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वह किसी के खिलाफ नहीं हैं और न ही किसी से कोई निजी मामला है. उन्होंने कहा कि मैं तो देश में लोकतान्त्रिक पार्टियों के रूप में एक मज़बूत विपक्ष देखना चाहता हूँ.
प्रधानमंत्री ने कहा कि यहाँ परिवारवाद का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अगर लोकतंत्र को मजबूर को मज़बूत करना है तो राजनीतिक पार्टियों परिवारवाद से ऊपर उठना होगा। उन्होंने कहा कि ये परिवारवाद ही है जो हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का गला घोंटता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग परिवारवाद की मेरी व्याख्या में सही बैठते हैं वो लोग मुझसे भड़के हुए हैं, मेरे खिलाफ एक जुट हो रहे हैं. प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि वो इस बात से भी नाराज हैं कि क्यों देश का युवा परिवारवाद के खिलाफ मोदी की बातों को इतना गंभीरता से ले रहा है। मैं इन लोगों को कहना चाहता हूं कि मेरी इस बात का गलत अर्थ ना निकालें।
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