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कठोर निर्णय लेकर आयरन लेडी कहलायीं इंदिरा गांधी

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कठोर निर्णय लेकर आयरन लेडी कहलायीं इंदिरा गांधी

सुनील शर्मा

महिलाओं के संघर्ष का सम्मान करने, उनको समान अधिकार दिलाने और उनके प्रति आभार प्रकट करने के लिये प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित इस दिवस पर देश और समाज के लिये उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। अन्र्तराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपकी प्रिय वेबसाइट बिजनेस बाइट्स भारत की उन चर्चित महिलाओं के बारे में आपको जानकारी देगा जिन्होंने राजनीति के क्षेत्र में अपने कार्यों से न केवल प्रतिष्ठा हासिल की बल्कि दुनिया में देश का नाम ऊंचा भी किया। 8 मार्च तक चलने वाली इस श्रृंखला में हम भारत की प्रमुख राजनीतिक महिलाओं के जीवन के अनछुए पहलुओं से आपको वाकिफ करायेंगे।

‘‘देश की सेवा करते हुए यदि मेरी जान भी चली जाए तो मुझे गर्व होगा। मुझे भरोसा है कि मेरे खून की एक-एक बूंद देश के विकास में योगदान देगी और देश को मजबूत एवं गतिशील बनाएगी।’’ अपने अंतिम भाषण में उक्त बातें कहने वाली भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री स्वः इंदिरा गांधी ने अपना जीवन देश के लिये समर्पित कर दिया। बतौर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में अनेक ऐसे फैसले लिये जिन्होेंने देश की दशा और दिशा बदल दी। राजनीतिक दृढ़ता के लिये जानी जाती पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी विश्व के ताकतवर नेताओं में शुमार थीं। सुपरपाॅवर अमेरिका के तत्कालीन प्रधानमंत्री निक्सन की आंखों में आंखे डालकर उनके फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर इंदिरा गांधी ने भारत की छवि एक निडर राष्ट्र के रूप में विश्व के समक्ष प्रस्तुत की। उनके अदम्य साहस और विनम्र स्वभाव की प्रशंसा उनके राजनीतिक विरोधी भी करते थे। उन्होंने विश्व को दिखाया कि एक महिला भी भारत जैसे विशाल देश की बागडोर बखूबी संभाल सकती है। उनका राजनीति में प्रवेश से लेकर बतौर प्रधानमंत्री उनका कार्यकाल अनेक महिलाओं के लिये प्रेरणा बना और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नेतृत्वकर्ता के रूप में संभव हो सकी।

अपने कार्यकाल में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अनेक कठोर फैसले लिये। मगर उनके पांच फैसले ऐसे रहे जिनकी चर्चा आज भी होती है। एक महिला के द्वारा ऐसे सख्त निर्णय लिये जाने और उनका दृढता से पालन कराये जाने ने देश ही नहीं दुनिया को अचंभित कर दिया था। यही कारण है कि इंदिरा गांधी को आॅयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता है। आईये जानते हैं उनके पांच ऐसे फैसलों के बारे में जिन्होंने देश की दशा और दिशा बदलने में महत्चपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रबल विरोध के बावजूद किया बैंकों का राष्ट्रीयकरण

प्रधानमंत्री पद पर कार्य करते हुए इंदिरा गांधी भारत को आर्थिक मोर्चे पर भी संपन्न देखना चाहती थी। उस वक्त देश के 70 प्रतिशत जमापूंजी बैंकों के पास थी जिनमें से अधिकतर बैंकों पर बड़े औद्योगिक घरानों का कब्जा था। ऐसे में उन्होंनेे बैंकों के राष्ट्रीयकरण करने का निर्णय लिया ताकि देश भर में बैंक क्रेडिट दिया जा सके। तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के द्वारा इस प्रस्ताव को अस्वीकार किये जाने के बावजूद इंदिरा गांधी अपने फैसले पर अडिग रहीं और 19 जुलाई 1969 को एक अध्यादेश लाकर 14 बैंकों का स्वामित्व राज्य के हवाले कर दिया गया। इसके बाद 1980 में छह और बैंकों का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। इस निर्णय से देश भर के ग्रामीण इलाकों तक में बैंकों की शाखाएं खुल गयीं और देश आर्थिक सुदृढता की ओर आगे कदम बढाता गया।

राजे-महाराजों के अधिकार और सहूलियतें वापस लीं

देश के आजाद होने के समय भारत में लगभग 500 रियासतें थीं जिन्हें भारत में एकीकरण करने के बदले वहां के राजा-महाराजाओं को प्रत्येक वर्ष प्रिवी पर्स (राजभत्ता) दिया जाता था। देसी रियासतों के एकीकरण के समय हुए इस समझौते के अन्र्तगत रियासतों के राजा-महाराजाओं को राजभत्ता के साथ अनेक अधिकार और सहूलियतेें भी दीं जाती थी। इसके चलते देश को बड़ा आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। इस बड़ी रकम का लाभ आम जनता को देने और देश के विकास में लगाने के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में संविधान में संशोधन करके राजा-महाराजाओं को दिये जाने वाले प्रिवी पर्स (राजभत्ता) को बंद करा दिया। यह निर्णय लेना आसान नहीं था और अनेक राजा-महाराजाओं ने इसका प्रबल विरोध भी किया। मगर इंदिरा गांधी की राजनीतिक दृढता के आगे उनकी एक न चली और उन्हें इस निर्णय को स्वीकार करना पड़ा। इससे देश को प्रतिवर्ष खर्च होने वाली रकम की बचत हुई और यह पैसा चंद लोगों के बजाये देश के विकास में काम आया।

अमेरिका का सामना कर कराया बांग्लादेश का उदय

आयरन लेडी इंदिरा गांधी इतनी साहसी थीं कि उन्होंने सुपर पाॅवर कहे जाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन की चेतावनी और अमेरिका के सातवें बेड़े की भी परवाह नहीं कि और 1971 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध में जीत हासिल कर बांगलादेश के रूप में एक नये राष्ट्र का उदय करा कर ही मानीं। 12 दिसंबर 1971 में सेनाध्यक्ष मानेकशाॅ और पूर्वी कमान के मुख्य कमांडर जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में भारतीय फौज ने पूर्वी पाकिस्तान पर चढ़ाई कर दी थी। पाकिस्तान के समर्थन में अमेरिका ने परमाणु युद्धक जहाज एंटरप्राइज के नेतृत्व में अपना सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में रवाना कर दिया। इस सूचना से देश भर में अफरा-तफरी मच गयी। दिल्ली के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करती हुईं प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपनी बुलंद आवाज में गरजीं, हम पीछे नहीं हटेंगे, हम एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। अपने निर्णय पर अडिग इंदिरा गांधी का रूख देखकर अमेरिका सहित विश्व भर के देश आश्चर्यचकित रह गये थे। इस युद्ध में भारतीय सेना ने करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया और बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का उदय हुआ।

स्माइलिंग बुद्धाः भारत का पहला परमाणु परीक्षण

सामरिक दृष्टिकोण से भारत को सृदृढ बनाने की प्रबल इच्छाशक्ति रखने वाली इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारत ने 18 मई 1974 को पोखरण में देश का पहला परमाणु परीक्षण किया था। राजस्थान के जैसलमेर से करीब 140 किमी दूर लोहारकी गांव के पास मलका गांव के सूखे कुएं में किये गये इस परमाणु परीक्षण को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्माइलिंग बुद्धा का नाम दिया था। इस परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाये लेकिन निडर प्रधानमंत्री ने बिना चिंता किये देश को शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य करना जारी रखा।

ऑपरेशन ब्लू स्टार को दी अनुमति

खालिस्तान बनाये जाने की मांग को लेकर देश का बंटवारा करने की मंशा मन में पाले जरनैल सिंह भिंडरावाले और उसके साथी अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे हुए थे। इन आतंकियों का मार गिराने के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टाॅर को अंजाम देने की अनुमति दी। धार्मिक स्थल पर सैन्य ऑपरेशन की अनुमति देने बड़ा साहसिक कार्य था। इस इस ऑपरेशन के जरिए भारतीय सेना ने पंजाब स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराया। बाद में इसी ऑपरेशन ब्लूस्टार का बदला लेने के मकसद से इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी।

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