अमित बिश्नोई
अखिलेश यादव ने आज लोकसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी, सूची में 16 नाम हैं और इनमें से कोई भी ऐसा नाम नहीं है जो नहीं होना चाहिए था, तीन नाम तो उनके परिवार के ही हैं। पत्नी डिंपल यादव और दो चचेरे भाई धर्मेंद्र और अक्षय यादव। डिंपल को उनकी मौजूदा सीट यानि मैनपुरी से उतारा गया है, वहीँ धर्मेंद्र यादव को बदायूं से, बदायूं से वो पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, दूसरे चचेरे भाई रामगोपाल यादव के सुपुत्र अक्षय यादव फ़िरोज़ाबाद से चुनाव लड़ेंगे। ये तीनों ही लोकसभा क्षेत्र सपा के गढ़ कहे जाते हैं। एक नाम काजल निषाद का है जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ से उम्मीदवार बनाई गयी हैं. काजल निषाद को गोरखपुर से उम्मीदवार बनाना काफी दिलचस्प मामला है.
गोरखपुर से फिलहाल भोजपुरी एक्टर रवि किशन योगी आदित्यनाथ के आशीर्वाद से सांसद हैं लेकिन उनके मुकाबले समाजवादी पार्टी ने एक भोजपुरी एक्ट्रेस को उम्मीदवार बनाकर मुकाबला दिलचस्प कर दिया है, हालाँकि अभी ये नहीं मालूम कि रवि किशन को गोरखपुर से भाजपा का टिकट मिलेगा या नहीं क्योंकि इसबार यूपी से कई सिटिंग सांसदों के टिकट कटना तय है, वैसे भाजपा में कोई भी सीट किसी के लिए पक्की नहीं है, कुछ लोगों को छोड़कर। वैसे रवि किशन को अगर गोरखपुर से भाजपा का टिकट मिला तो दो भोजपुरी स्टार्स में टक्कर देखने वाली होगी। जहाँ तक काजल निषाद की बात है तो वो राजनीती में नई नहीं हैं। वो विधानसभा के दो चुनाव लड़ चुकी हैं, पहली बार 2012 में कांग्रेस पार्टी की तरफ से और दूसरी बार 2021 में सपा की तरफ से. अब उनकी तरक्की हो गयी है और इसबार उन्हें सपा ने सांसदी के लिए टिकट दिया है. साल 2009 में कॉमेडी शो लापतागंज से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली काजल निषाद भोजपुरी फिल्मों की एक सुपर स्टार हैं और रवि किशन को टक्कर देने की पूरी क्षमता रखती हैं.
सपा की इस लिस्ट में तीन सिटिंग सांसदों में से दो के नाम तो हैं लेकिन तीसरे का नाम नदारद है. ये तीसरा नाम मुरादाबाद से सांसद टी एस हसन का है. उनका नाम इस लिस्ट में क्यों नहीं हैं इसपर खुसपुसाहट शुरू हो चुकी है। बात हो रही है कि 90 साल के बर्क़ पर तो अखिलेश ने भरोसा जताया है लेकिन हसन पर क्यों नहीं। क्या मुरादाबाद सीट को लेकर कांग्रेस से कोई डील हुई है या फिर अखिलेश ने खुद मुरादाबाद से हसन के नाम का एलान न करके कांग्रेस के लिए रास्ता छोड़ा है क्योंकि कांग्रेस पार्टी भी मुरादाबाद को लेकर कई बार दावा कर चुकी है.
जहाँ तक कांग्रेस के दावों की बात है तो क्या अखिलेश ने कांग्रेस को बताया है कि सपा ने कांग्रेस के लिए 11 सीटें कौन कौन सी छोड़ी हैं. क्योंकि प्रदेश स्तर पर तो किसी भी नेता को नहीं मालूम कि अखिलेश जो कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने के लिए जिन 11 सीटों के साथ चलने की बात कर रहे हैं वो सीटें कौन सी हैं. दो सीटें रायबरेली और अमेठी का अंदाजा तो सबको है मगर 9 सीटें और कौन सी? बात तो लखनऊ की भी हो रही थी, राजबब्बर का नाम भी कांग्रेस की तरफ से सामने आया था. कांग्रेस ने भाजपा के इस गढ़ में हमेशा भाजपा को टक्कर दी. राजबब्बर हों, कर्ण सिंह हो या फिर रीता बहुगुणा। तीनों का प्रदर्शन भाजपा के उम्मीदवारों से तो कई गुना अच्छा रहा है। लेकिन यहाँ से रविदास मेहरोत्रा को प्रत्याशी बना दिया गया है। राजनाथ सिंह और रविदास मेहरोत्रा, दोनों के बीच कोई मुकाबला नहीं है.
UPCC के सभी बड़के नेता इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं, शायद ऊपर से कुछ न बोलने के निर्देश दिए गए हैं वरना कुछ समय पहले तक तो सपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. मध्य प्रदेश चुनाव में अखिलेश का ज़रुरत से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना इन्हीं बयानबाज़ियों का नतीजा था। फिलहाल तो यही कहा जा रहा है कि राहुल और अखिलेश में बातचीत तय हो गयी है, हालाँकि अभी इसपर कांग्रेस की तरफ से कोई भी आधिकारिक, औपचारिक या अनौपचारिक किसी भी तरह का कोई बयान नहीं आया है। सब मानकर चल रहे हैं कि फार्मूला तय हो चूका है और इसीलिए अखिलेश ने अपनी पहली सूची भी जारी कर पहल कर दी है. हालाँकि कुछ लोग इसे अखिलेश की पेशबंदी भी कह रहे हैं हालाँकि उनके पास इसके लिए कोई ठोस तर्क नहीं है। फिलहाल तो यही लगता है कि यूपी में इंडिया गठबंधन सही राह पर है, आगे देखते हैं क्या होगा। नितीश भी इंडिया गठबंधन में सबसे आगे थे, आज वो कहाँ पर हैं सबको मालूम है.

