मेरठ में पीएनजी से होगा दाह संस्कार, नहीं काटने होंगे पेड़

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मेरठ में पीएनजी से होगा दाह संस्कार, नहीं काटने होंगे पेड़

सूरजकुंड में जर्जर हो शवदाह ग्रह में लग रहा गैस प्लांट
1 घंटे में भी हो जाएगा बॉडी का दाह संस्कार

मेरठ। कोविड 19 से लोगों को ऐसे जख्म दिए हैं कि लोग चाहकर भी नहीं भूल सकते. पहले कोरोना से अपनों की जान गंवाने का दर्द और उसके बात इन जख्मों को और हरा करने का काम शवदाह ग्रह में बॉडी की अंतेष्टी के लिए घंटों इंतजार करना. कही लकड़ी की कमी का रोना तो कही इंसान की शक्ल लिए गिद्धों का हद से ज्यादा रुपयों का वसूल करना. यह सब ऐसे तमाचे रहे सिस्टम के जिसने लोगों को अंदर तक तोड़ दिया. अब सिस्टम में कुछ सुधार किया जा रहा है. थर्ड वेव को लेकर तैयारी चल रही है. मेरठ के शवदाह ग्रह की व्यवस्था में भी बदलाव किया जा रहा है. मेरठ नगर निगम और गंगा मोटर कमेटी मिलकर सूरजकुंड में जर्जर हो सके शवदाह ग्रह में गैस प्लांट लगा रहे हैं. इसके पूरे होते ही शव का अंतिम संस्कार पीएनजी गैस का यूज करके 1 घंटे में ही किया जा सकेगा. इसके बाद से पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

पर्यावरण साफ रखने में मिलेगी मदद

गंगा मोटा कमेटी के सदस्य ने बताया कि एक सिलेंडर गैस और तकरीबन 6 से 8 यूनिट के अंदर ही बॉडी पूरी तरह जलकर राख हो जाएगी. यह प्लांट 10 से 15 दिन में बनकर तैयार हो जाएगा.शव की अंतेष्टि में समय कम लगेगा और धुअें से लोग परेशान भी नहीं होंगे. प्लांट में एक जाली लगी होगी जहां से अस्थि फूल मिल जाएंगे. बॉडी के अवशेष लेकर उसे नदी में प्रवाहित कर सकेंगे. पर्यावरण को साफ रखने में भी मदद मिलेगी.

एवरेज पांच से सात क्विवंटल लकड़ी लगती है

एक सामान्य बॉडी को जलाने में एवरेज पांच से सात क्विंटल तक लकड़ी को जलाने की जरूरत पड़ती है. बरसात में अक्सर लकड़ी गीली होने की भी शिकायत आती है. ज्यादा डेथ होने पर जैसा की कोविड के बढ़े आउटब्रेक के दौरान देखा गया कि लोगों को तय कीमत से ज्यादा रकम चुकानी पड़ी. अब जब गैस आधारित प्लांट शुरु हो जाएगा तो लोगों को आर्थिक बोझ कम सहना होगा. साथ ही वर्षों से जर्जर पड़ी इस जगह का भी यूज किया जा सकेगा. पेड़ काटने के क्रम में कटौती होगी.

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