प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। जिसमें हाईकोर्ट की पीठ ने कहा है कि मुस्लिम तलाकशुदा महिला जब तक पुनर्विवाह नहीं करती। वह तब तक पति से गुजारे भत्ते का दावा कर सकती है।
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हाईकोर्ट ने इमरान खान बनाम शबाना बानो मामले में यह आदेश दिए। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, प्रतापगढ़ द्वारा पारित निर्णय और आदेश के खिलाफ दायर याचिका को अनुमति देते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए यह आदेश दिया।
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चिली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए अधिनियम धारा 3 और धारा 4 के तहत भरण-पोषण पाने का हक नहीं बनता हैं। ऐसी मुस्लिम महिलाएं सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं हैं। निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया है।

