नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन (NIV ) पर रेसमेड इंडिया का महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रशिक्षण

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नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन (NIV ) पर रेसमेड इंडिया का महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रशिक्षण

जाने-माने चिकित्सकों के लिए पटना में नाॅन-इन्वेसिव उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण

पटना: रेसमेड, समाधान जो उपचार करते हैं और लोगों को अस्पताल से दूर रखते हैं, उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले जीवन जीने के लिए सशक्त बनाते हैं। हमारे क्लाउड से जुड़े चिकित्सा उपकरण स्लीप एपनिया, सीओपीडी और अन्य पुरानी बीमारियों से झूझ रहे लोगों की देखभाल करते हैं।इसके व्यापक आउट-ऑफ-हॉस्पिटल सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म पेशेवरों और देखभालकर्ताओं का समर्थन करते हैं जो लोगों को घर में स्वस्थ रहने और उनकी पसंद की देखभाल में मदद करते हैं। बेहतर देखभाल को सक्षम करके, हम जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं, पुरानी बीमारी के प्रभाव को कम करते हैं और 140 से अधिक देशों में उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के लिए कम लागत में काम करते हैं।

रेसमेड इंडिया मुख्यतः ऐसे लोगों और तकनीकियों के साथ कार्यरत है जो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बड़े बदलाव लाने में सक्षम हैं। रेसमेड एकेडमी रेसमेड इंडिया का क्लिनिकल प्रभाग है और यह चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए पूरे साल शैक्षिक सत्रों एवं कार्यशालाओं (वर्कशाॅप) का आयोजन करता है। मुख्यतः एनआईवी और स्लीप एप्नीया पर केंद्रित इन आयोजनों का मकसद चिकित्सा विशेषज्ञों को आधुनिक ज्ञान और मरीजों को स्वास्थ्य लाभ देना है।

अस्पताल और मरीज के घर पर नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन के उपयोग पर यह एक दिन का वर्कशाॅप था जिसमें 30 से अधिक मशहूर और जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ/ श्वांस एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ आए। यह अभूतपूर्व वर्कशाॅप पटना के होटल मौर्या में आयोजित किया गया।

नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन (NIV ) पर रेसमेड इंडिया का महत्वपूर्ण शैक्षिक प्रशिक्षण

वर्कशाॅप में नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन के सिद्धांत और प्रयोग दोनों की जानकारी दी गई। विभिन्न प्रकार की सांस की समस्याओं जैसे कि एक्यूट हाइपर कैपनिक फेल्यर और क्राॅनिक हाइपरकैपनिक फेल्यर के मरीजों के लिए नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन के लाभ बताए गए। क्राॅनिक समस्या के निदान में एनआईवी के उपयोग और एनआईवी के दिशा निर्देशों पर भी विमर्श किया गया।

नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन में शल्य प्रक्रिया जैसे एंडोट्रैकियल इनट्यूबशन या ट्रैकोस्टोमी के बिना मरीज का वेंटिलेशन किया जाता है। इसमें पूरे चेहरे का मास्क होता है जो सांस लेने और सांस छोड़ने के लिए पाॅजिटिव प्रेशर देता है और वेंटिलेशन (सांस अंदर-बाहर करने) में सुधार करता है। यह सांस की विभिन्न समस्याओं, विशेष कर सीओपीपीडी के उपचार में बहुत असरदार है।

फेफड़ों के इम्फायसेमा की बढ़ती समस्या, क्राॅनिक ब्रोंकाइटिस, रिफ्रेक्टरी आस्थमा और ब्रोंकाइक्टाइसिस आदि समस्याओं को सामुहिक रूप से सीओपीडी कहते हैं। इसमें मरीज के लिए सांस लेना कठिन होता है। यह विशेष कर ठण्ड में भारत में होने वाली मृत्यों के प्रमुख कारणों में एक है। सर्वे से यह सामने आया है कि 2017-18 में घर के अंदर और बाहर के प्रदूषण की वजह से 12 लाख से अधिक लोगों ने दम तोड़ दिए। सीओपीडी के सबसे आम कारणों और जोखिमों में खुद धूम्रपान करना, अन्य के धूम्रपान की चपेट में आना, धुआं, रसायन और कंस्ट्रक्शन साइट का प्रदूषण है।

ऐसे मरीजों के लिए एनआईवी बहुत लाभदायक है क्योंकि यह उन्हें सांस लेने की प्रक्रिया के लिए आवश्यक प्रेशर देता है और सांस लेने में सहायक है जिससे बहुत कम समय में उनके फेफड़ों में अधिक हवा पहुँचती है। इससे सांस लेने में दम नहीं लगता, सांस लेने की दर घटती है और सांस छोड़ने के लिए ज्यादा समय मिलता है।

सिम्पोज़ियम का शुभ आरंभ डाॅ. विभु प्रसार ने किया जो मदन राज नर्सिंग के डायरेक्टर हैं। इसके बाद डॉ. सौरभ कर्मकार, एसोसिएट प्रोफेसर , डिपार्टमेंट ऑफ़ पल्मोनरी मेडिसिन, AIIMS, पटना,डॉ. प्रशांत कुमार सिंह ,कंसलटेंट पुलमोनोलॉजिस्ट ,रुबान पाटलिपुत्र हॉस्पिटल ,डॉ. साकेत शर्मा ,कंसलटेंट पुलमोनोलॉजिस्ट ,मेडिवेर्सल हॉस्पिटल ,पटना ,डॉ. एस.के. मधुरकर ,डायरेक्टर ,मधुकर क्लिनिक एंड लंग हॉस्पिटल ,पटना एंड डॉ. किशोर झुनझुनवाला,असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ अनेस्थेसिअ, NMCH,पटना ने इस संबंध में अपने विचार रखे। ये नाॅन-इन्वेसिव वेंटिलेशन के विशेषज्ञ हैं।

यह वर्कशाॅप स्वास्थ्य सेवा के पेशे से जुड़े सभी भागीदारों के लिए सीखने, जानकारी साझा करने और आपसी संपर्क का साझा मंच था। इसमें पूरे स्वास्थ सेव क्षेत्र के विभिन्न विषयों के जानकार श्रोताओं की उपस्थिति दिखी। उन्होंने अपने अनुभव, विचार साझा किए और इस क्षेत्र की सीमाओं को लांघ कर अभूतपूर्व कदम रखे।

चलन में मौजूद अन्य वेंटिलेटरों से हट कर इस वेंटिलेटर के उपयोग के लिए मरीज को केवल मास्क लगाना होगा, यदि वह जगा है, संवाद कर सकता है और खा-पी सकता है। इसके कई लाभ हैं जैसे कि बेहोश करने में कमी, मरीज को ज्यादा आराम, एम्बुलेटरी वेंटिलेशन, मरीज का जल्द स्वस्थ होना, मरीज का खर्च कम होना और अस्पताल से जल्द छुट्टी होना।

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