मेरठ। मेरठ गंगानगर स्थित आईआईएमटी डीम्ड विश्वविद्यालय आमतौर पर हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। अब इसी आईआईएमटी का एक और मामला उजागर हुआ है। इस मामले में भी आईआईएमटी विश्वविद्यालय प्रबंधन तंत्र की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आईआईएमटी डीम्ड विश्वविद्यालय प्रबंधन तंत्र ने बिना जांच पड़ताल के अपने यहां एक अपराधी किस्म के व्यक्ति को वाइस चांसलर नियुक्त कर दिया। इस व्यक्ति की अधिकांश डिग्रियां फर्जी थी। इतना ही नहीं जिस व्यक्ति को आईआईएमटी प्रबंधन तंत्र ने विश्वविद्यालय की कमान सौंपी वह एक बार जेल भी जा चुका है। सबसे बड़ी हास्याप्रद बात ये कि जिस मनोज कुमार मदान को आईआईएमटी प्रबंधन तंत्र ने अपने यहां पर वाइस चांसलर नियुक्त किया वो पूरे आठ महीने तक विवि की कमाने संभाले रहा। इस दौरान ना तो आईआईएमटी प्रबंधन तंत्र ने अपने तथाकथित वाइस चांसलर के शैक्षिक दस्तावेज जांच करवाने की कोशिश की ना मनोज कुमार मदान के चरित्र के बारे में ही पता किया। मनोज कुमार मदान अपने फर्जी शैक्षिक दस्तावेज के सहारे पूरे आठ महीने यानी 18 सितंबर 2020 से 20 मई 2021 तक आईआईएमटी विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर बना रहा।

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20 मई 2021 को आईआईएमटी विवि का तथाकथित वीसी मनोज कुमार मदान त्यागपत्र देकर चला गया। आईआईएमटी प्रबंधन तंत्र की ओर से विवि के पूर्व वीसी रहे मनोज कुमार मदान के नाम रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए जो तहरीर दी गई है। उस तहरीर के मुताबिक मनोज कुमार मदान की पीएचडी की डिग्री फर्जी है। इसके अलावा वो मोदी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विवि लक्ष्मणगढ़ सीकर राजस्थान में भी नौकरी कर चुका है। बताया जाता है कि उसके विरूद्ध वहां पर मुकदमा दर्ज है। जिसमें वह जेल भी जा चुका है। सबसे बड़ा सवाल है कि आजकल जहां शैक्षणिक संस्थाएं एक क्लर्क की नियुक्ति से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी करती हैं तो वहीं आईआईएमटी विश्वविद्यालय प्रबंधन तंत्र ने ऐसे अपराधी व्यक्ति को कैसे वाइस चांसलर जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति दे दी।

