ITR Return: income tax return भरना बहुत जरूरी होता है। पूरा ध्यान रखने के बाद रिटर्न भरते समय चूक होने का या गलत जानकारी भरने का खतरा रहता है। अच्छी बात है कि आयकर विभाग ऐसी चूक करने वालों को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139 (5) के तहत संशोधित रिटर्न दाखिल करने का मौका देता है।
कौन भर सकता है?
पहले रिटर्न भर चुके कोई भी व्यक्ति या संस्था बाद में कोई चूक मिलती है या कुछ भरने से छूट जाने की बात पता चल जाती है तो संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। कर निर्धारण वर्ष (असेसमेंट वर्ष) खत्म होने में अधिक से अधिक तीन महीने बचे हों या कर निर्धारण पूरा नहीं हुआ हो। इनमें से पहले हो तभी तक संशोधित रिटर्न भरा जा सकता है।
वित्त वर्ष 2022-23 (कर निर्धारण वर्ष 2023-24) के लिए संशोधित रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2023 है। बशर्ते पहले भरे रिटर्न का आकलन उस समय तक पूरा न किया गया हो। वित्त अधिनियम, 2021 में संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा बदल गई है। पहले असेसमेंट वर्ष खत्म होने तक या असेसमेंट पूरा होने में से जो पहले होता था। उससे पहले संशोधित रिटर्न दाखिल करने का अवसर आयकर दाताओं के पास होता था। रिटर्न संशोधित करने की कोई सीमा नहीं है यानी करदाता जितनी बार चाहे, उतनी बार इसमें संशोधन कर सकता है।
नोटिस का ना करें इंतजार, तुरंत भरें संशोधित return
यदि संशोधित रिटर्न भरने की जरूरत महसूस होती है तो उठिए और तुरंत भर डालिए। इसके लिए धारा 143(3) के तहत कर विभाग से नोटिस आने का इंतजार ना करेंं। हाल में सूचना आई थी कि आयकर विभाग ने करदाताओं को 1 लाख नोटिस जारी किए। इससे समझ आना चाहिए कि संशोधित रिटर्न जल्दी दाखिल करना कितना जरूरी होता है। संशोधित रिटर्न भरने पर आयकर विभाग किसी प्रकार का जुर्माना या शुल्क नहीं लगाता। लेकिन अगर संशोधित रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख निकल गई तो जुर्माना जरूर लगता है। आखिरी तारीख निकल गई तो आयकर अधिनियम की धारा 234एफ के तहत 5,000 रुपए का जुर्माना लगता है। लेकिन आयकर 5 लाख रुपए से अधिक नहीं हुआ तो केवल 1,000 रुपए वसूले जाते हैं।
आयकर रिटर्न संशोधन से बार-बार बचें
रिटर्न भरने के बाद कुछ और जानकारी मिलने पर उसे संशोधित रिटर्न में दाखिल किया जाता है। आयकर रिटर्न में संशोधन तभी किया जा सकता है। जब पहले चूक जानबूझकर नहीं की गई हो। कोई जानकारी छिपाई गई हो या गलत जानकारी दी हो तो संशोधित रिटर्न की सहूलियत नहीं मिलती। संशोधित रिटर्न भरते समय सतर्क रहें जिससे कि फिर से गलतियां न हो। रिटर्न में बार-बार बदलाव करना गैर-कानूनी तो नहीं है मगर ऐसा करने पर अधिकारियों की नजर में आ सकते हैं। मूल रिटर्न और आखिरी रिटर्न में बहुत फर्क हो तब कर विभाग द्वारा जांच किया जाना जरूर पक्का है। रिटर्न में संशोधन करते समय जानबूझकर कोई जानकारी हटा या छोड़ दी गई तो जुर्माना लगाया जा सकता है।

