मैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला कहकर बचा ली अपनी जान!

उत्तर प्रदेशमैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला कहकर बचा ली अपनी जान!

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मैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला कहकर बचा ली अपनी जान!

राज्यमंत्री की हत्या प्रकरण से जरायम की दुनिया में उठा था नाम

कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी

कानपुर गोलीकांड का आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है. एनकाउंटर के सातवें दिन विकास को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया, बताया जा रहा है कि उसने खुद ही स्थानीय मीडिया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी विकास पर कोई असर नहीं दिखा और मीडिया के सामने चिल्लाने लगा, ‘..मैं विकास दुबे हूं…कानपुर वाला. इन लोगों ने पकड़ लिया है.जब वह पकड़ा गया तो उसने यह बात हेकड़ी में कही. इससे इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि आखिर उसने महाकाल मंदिर में ही क्यों चुना. मध्यप्रदेश राज्य क्यों चुना.जानकार बता रहे हैं कि मध्यप्रदेश में उसके खिलाफ कोई केस नहीं था. इसलिए उसका एनकाउंटर नहीं हो सकता था. महाकाल मंदिर में सीसीटीवी लगे है. इसलिए उसकी आइडेंटिटी रिकॉर्ड हो गई.ऐसे में यह हो रहा है कि जानबूझकर यह बोला जिससे उसकी जान बच सके.

250 रुपये की पर्ची कटवाई
आज सुबह ही विकास दुबे महाकालेश्वर मंदिर पहुंचा और सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर विकास दुबे ने मंदिर के सामने अपना नाम चिल्लाया. मौके पर स्थानीय मीडिया को भी बुलाया गया था. बताया ये भी जा रहा है कि उसने मंदिर के बाहर खड़े होकर अपना नाम चिल्लाया, फिर लोगों ने पुलिस को सूचित किया.

कैसे उज्जैन पहुंचा विकास दुबे?
आपको बता दें कि विकास दुबे कानपुर की घटना के बाद भाग गया था, जिसके बाद हरियाणा के फरीदाबाद में उसकी झलक दिखी थी. फरीदाबाद के एक होटल के सीसीटीवी कैमरे में विकास दुबे को देखा गया था, लेकिन वो वहां से फरार हो गया. छापे में उसके गुर्गे गिरफ्तार कर लिए गए थे.विकास दुबे लगातार छुपता हुआ भाग रहा था, पहले उसके नोएडा और फिर राजस्थान जाने की बात की जा रही थी. ऐसे में पुलिस ने एनसीआर में लगातार छापेमारी की थी. लेकिन विकास दुबे वहां पर भी नहीं मिला.अब सात दिन बाद उसके उज्जैन में मिलने की खबर आई.सूत्रों की मानें तो फरीदाबाद से मध्य प्रदेश तक वो आसानी से एक गाड़ी में पहुंचा, जो पूरी तरह सेफ थी. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इतनी बंदिशों के बाद भी विकास दुबे आखिर कैसे इतना लंबा सफर कर पाया.

2001 की थाने के अंदर हुई घटना
वर्ष 2001 में विकास दुबे ने पुलिस थाने में घुसकर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी. इसी मामले में हिस्ट्रीशीटर के घर पुलिस गुरुवार की रात दबिश देने गई थी. इस दौरान विकास दुबे और उसके गुर्गों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस फायरिंग में डीएसपी, दरोग समेत 8 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद जैसे पूरे देश में हलचल मच गई थी. एक विकास दुबे ने पूरी प्रदेश की फोर्स को खूब नचाया लेकिन अंतत: हफ्तेभर में उसकी गिरफ्तारी भी हो गई.

विकास दुबे के दाहिए हाथ अमर दुबे का हुआ एनकाउंटर
बुधवार के दिन विकास दूबे का दाहिना हाथ माने जाने वाले अमर दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया गया. अमर दूबे को हमीरपुर में हुए मुठभेड़ में पुलिस ने मार गिराया था. बता दें कि अमर दूबे को विकास दूबे का बेहद करीबी माना जाता है. बता दें कि अमर की कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी. जिस रात पुलसकर्मियों की निर्ममता से हत्या की गई थी उस दिन गोलीबारी करने में अमर दुबे भी शामिल था.

श्यामू बाजपेयी की गिरफ्तारी

बुधवार के दिन विकास दूबे के एक करीबी साथी श्यामू बाजपेयी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. श्यामू और पुलिस के बीच हुई गोलीबारी में श्यामू के पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया था. इसके बाद श्यामू को गिरफ्तार कर पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर गई. बता दें कि श्यामू बाजपेयी पर पुलिस ने 25,000 का इनाम भी रखा था.

गुरुवार को हुआ एक और एनकाउंटर

हफ्ते भर से यूपी पुलिस को विकास दुबे की तलाश थी. इसी मामले में विकास दुबे के करीबी सहयोगी कार्तिकेय की पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करते समय गोली लगने से मौत हो गई. एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को इसकी जानकारी दी थी. इस बाबत उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया कि कार्तिकेय ऊर्फ प्रभात ने ट्रांजिट रिमांड पर फरीदाबाद से कानपुर लाये जाने के दौरान पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि कार्तिकेय ने पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीन कर एसटीएफ कर्मियों पर गोली चला दी, जिसमें दो कर्मी घायल हो गए. कुमार ने बताया कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में कार्तिकेय घायल हो गया था और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया.

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