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राम मंदिर विवाद: जब पलट गई थी सरकार, मुलायम सिंह को देना पड़ा था इस्तीफा

उत्तर प्रदेशराम मंदिर विवाद: जब पलट गई थी सरकार, मुलायम सिंह को देना...

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history of ram mandir buzinessbytes series 5:अयोध्या में राम मंदिर और मस्जिद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था। धीरे-धीरे देश में यह लड़ाई व्यापक स्तर पर पहुंच रही थी। हिंदू मुस्लिम संबंध में बड़ी उत्तर-पुथल पैदा हो चुकी थी। 1990 तक आते-आते राम मंदिर का मामला पूरी तरह से राजनीतिक मुद्दों में बदल चुका था। हर पार्टी चुनाव में इसे अपना एजेंडा बना रही थी। विवादित परिसर में मंदिर के निर्माण को लेकर रैलियों में मुद्दे उठाए जाने लगे। वहीं इस विवाद में 1990 एक ऐसा साल रहा जिसने राजनीतिक दलों को पूरी तरह से हिला कर रख दिया। इस वर्ष हुई घटनाओं ने आने वाले सालों में राजनीतिक पार्टियों की भविष्य की नींव रखी। इतिहासकार बताते हैं कि 1989 में राजीव सरकार का पतन हुआ और वीपी सिंह सरकार के गठन के बाद राम पूरी तरह राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो गए ।

2 नवंबर 1990 में हुआ था नृशंस हत्याकांड

राम मंदिर विवाद में 2 नवंबर 1990 का दिन काले पन्ने में दर्ज है। रिपोर्ट के मुताबिक 2 नवंबर को सैकड़ो कार सेवक अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ने पहुंचे थे। उस वक्त उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए उन्होंने धार्मिक स्थल पर किसी भी तरह के विवाद को रोकने के लिए कार सेवकों पर गोली चलाने के आदेश दे दिए । इसी दिन कोठारी बंधुओ ने बाबरी मस्जिद पर चढ़कर वहां भगवा ध्वज भी फहरा दिया था जिसके बाद उनकी नृशंस हत्या कर दी गई। ऐसा माना जाता है कि इस महायज्ञ में सैकड़ों राम भक्तों ने अपने जीवन की आहुतियां दी थी। सरयू नदी राम भक्तों के खून से लाल हो गई । इस हत्याकांड के बाद देश भर में हिंदुओ में आक्रोश पैदा हो गया। अखबारों की हेडलाइंस में भी इस कांड को जलियांवाला कांड से भी बड़ा बताया गया। कई रिपोर्ट्स बताती है कि इस दौरान तकरीबन 200 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था । कोठारी बंधु शरद कुमार और राजकुमार की हत्या ने इसमें अलग ही मोड़ दे दिया था। इतिहासकरों के मुताबिक सैकड़ो राम भक्तों ने जय श्री राम का नारा लगाते हुए विवादित बाबरी ढांचे पर राम की ध्वजा लहराई थी, जिसके बाद ही मुलायम सिंह यादव ने गोली चलाने के आदेश दे दिए थे। कार सेवकों को अंधाधुंध फायरिंग झेलनी पड़ी। यह भी बताया जाता है कि इसी दिन कोठारी बंधुओ को उनके घर से खींच कर लाया गया और सरेआम गोलियों से भून दिया गया। 2 नवंबर 1990 को हुए इस भीषण गोलीकांड के बाद प्रदेश की सरकार बदल गई 1991 में मुलायम सिंह सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था।

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