- आरएसएस प्रमुख ने कहा, हिंदुत्व मार्केटिंग करना नहीं सिखाता
धर्मशाला। 40 हजार साल से हमारा एक ही डीएनए है। आततायी भारत आये और अपनी संस्कृति, भाषा, वाणी हम पर थोपते रहे। लेकिन हमारे पास अपनी संस्कृति और संस्कार मौजूद हैं और हम उसी पर चलते हैं। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि इंसान के लिये इंसान जैसा व्यवहार करना ही हिंदुत्व है। भागवत ने कहा कि हिंदुत्व मार्केटिंग करना नहीं सिखाता है।
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शनिवार को धर्मशाला कालेज के सभागार में पूर्व सैनिक प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम गुरू नानक देव जी ने किया था।‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर्याय ही हिंदुत्व है।
पूर्व सैनिकों को शाखा और स्वयंसेवक का मतलब समझाते हुए आरएसएस प्रमुख ने उनसे अपने दिन का एक घंटा देश और समाज को देने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि सम्मानित सैनिकों के लिये आरएसएस में पूर्व सैनिक सेवा परिषद है जिससे जुड़कर सैकड़ों पूर्व सैनिक आज सेवाकार्य कर रहे हैं।
भागवत ने कहा कि जरूरी नहीं है की सभी संघ के कार्यकर्ता हों लेकिन इसके बावजूद वह परिषद से जुड़ते हैं क्योंकि यह कार्य संघ के लिये नहीं देश के लिये है। देश के वैभव के को सदैव जिंदा रखने का प्रयास करने वाले आरएसएस के बारे में यह लिखा जायेगी की संघ ने देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।
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आरएसएस प्रमुख ने कहा कि कोरोना संक्रमण ने भारत की पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित कर दिया है। आज विश्व भी यह चाहता है कि भारत अपना माॅडल अपने मुताबिक खड़ा करे। इससे भारत भले ही बड़ी शक्ति न बने परंतु विश्व गुरु तो बन ही सकता है।

